झारखंड में बिजली का 'झटका': भाजपा ने हेमंत सरकार की दर वृद्धि को बताया जनविरोधी

शहरी दर 6.85 से बढ़कर 7.40 और ग्रामीण 6.70 से बढ़कर 7.20 रुपये हुई

झारखंड में बिजली का 'झटका': भाजपा ने हेमंत सरकार की दर वृद्धि को बताया जनविरोधी
(अजय साह फाइल फोटो)

झारखंड भाजपा ने हेमंत सरकार द्वारा बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई दरें आम जनता पर भारी बोझ हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और विधायकों के लिए आलीशान भवनों और महंगी गाड़ियों पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, जबकि जनता को राहत देने के बजाय बिजली महंगी की जा रही है। भाजपा ने वित्तीय कुप्रबंधन, डीएमएफटी फंड के दुरुपयोग और ऊर्जा विभाग में भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

रांची: भाजपा ने हेमंत सरकार द्वारा राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर दरों में बढ़ोतरी किए जाने के फैसले पर जोरदार हमला बोला है। सरकार ने ग्रामीण इलाकों में बिजली दर 6.70 रुपये से बढ़ाकर 7.20 रुपये प्रति यूनिट और शहरी इलाकों में 6.85 रुपये से बढ़ाकर 7.40 रुपये प्रति यूनिट कर दी है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने इस फैसले को पूरी तरह जनविरोधी और विकास विरोधी करार दिया है।

अजय साह ने कहा कि हेमंत सरकार की प्राथमिकताएँ पूरी तरह से उल्टी हैं। सरकार के पास मुंबई में 130 करोड़ रुपये के ऊपर की लागत से झारखंड भवन बनाने के लिए पैसा है, मुख्यमंत्री जी के पास अपने लिए सौ करोड़ का आलीशान भवन बनाने के लिए पैसा है, विधायकों के आवास पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के लिए पैसा है, महंगी गाड़ियों को खरीदने के लिए पैसा है, लेकिन आम जनता को राहत देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। यह सरकार जनता को राहत देने के बजाय लगातार उन पर आर्थिक बोझ डालने का काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि जेएमएम और कांग्रेस के नेताओं ने पहले एलपीजी और पेट्रोल-डीजल के नाम पर अफवाह फैलाकर जनता के बीच डर और भ्रम का माहौल बनाने की कोशिश की, और अब जब जनता राहत की उम्मीद कर रही थी, तब सरकार ने बिजली दर बढ़ाकर जनता की कमर तोड़ने का काम किया है। आरोप लगाया कि डीएमएफटी फंड का उपयोग आम जनता की भलाई के लिए करने के बजाय सरकारी अधिकारियों द्वारा मौज-मस्ती, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में किया गया। ऊर्जा विभाग से अवैध निकासी का मामला अभी भी जांच का विषय है, जो सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

झारखंड में वित्तीय कुप्रबंधन चरम पर है और अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में झारखंड भी हिमाचल प्रदेश की तरह आर्थिक बदहाली और वित्तीय दिवालियेपन की राह पर जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब से हेमंत सरकार बनी है, तब से राज्य की आय बढ़ाने के लिए कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। सरकार का पूरा ध्यान कोयला, बालू और अन्य अवैध धंधों को बढ़ावा देने तथा उससे जुड़े निजी राजस्व पर रहा, जबकि उत्पाद जैसे जिन क्षेत्रों से सरकार को वैध राजस्व मिल सकता था, वहां योजनाबद्ध तरीके से घोटाले कर सरकारी पैसे का बंदरबांट किया गया। भाजपा ने मांग की है कि सरकार तुरंत बिजली दर वृद्धि वापस ले और जनता पर बोझ बढ़ाने के बजाए अपने वित्तीय प्रबंधन को दुरुस्त करे।

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Edited By: Anjali Sinha

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