लॉकडाउन हत्याकांड: 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा, अविनाश राजा बोले— न्याय जिंदा है
झारखंड की कानून व्यवस्था पर भी उठाए गंभीर सवाल
तमिलनाडु में लॉकडाउन के दौरान पिता-पुत्र की हत्या मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के फैसले का पलामू में स्वागत हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता अविनाश राजा ने इसे लोकतंत्र और न्याय की जीत बताया।
पलामू: तमिलनाडु की एक अदालत द्वारा लॉकडाउन के दौरान पिता-पुत्र की बर्बरतापूर्वक हत्या के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाए जाने के फैसले का पलामू प्रमंडल में व्यापक स्वागत किया गया है। ‘पलामू प्रमंडल की आवाज’ के नाम से चर्चित अविनाश राजा (वकालत प्रैक्टिशनर, जर्नलिस्ट एवं AHP अध्यक्ष) ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया है।
“खाकी के वेश में गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं”
प्रेस को जारी एक बयान में अविनाश राजा ने कहा कि तमिलनाडु कोर्ट का यह फैसला उन भ्रष्ट और क्रूर अधिकारियों के लिए एक कड़ा सबक है, जो वर्दी की आड़ में आम जनता का शोषण करते हैं। उन्होंने कहा, “जिनका निर्माण जनता की सुरक्षा के लिए हुआ था, वही आज मासूमों को नोच रहे हैं। लॉकडाउन में दुकान चलाने वाले एक पिता-पुत्र को जिस बेहरमी से टॉर्चर कर मार डाला गया, वह मानवता पर कलंक था। आज सत्य की जीत हुई है और यह साबित हो गया है कि देश में अभी लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था जिंदा है।”
झारखंड की कानून व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

सेना और पुलिस के बीच अंतर को किया रेखांकित
बयान में उन्होंने भारतीय सेना के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा, “एक ओर हमारी सेना की वर्दी है, जिसे देखकर बच्चा-बच्चा सुरक्षित महसूस करता है और सम्मान में सिर झुक जाता है; वहीं दूसरी ओर पुलिस के कुछ ‘भक्षकों’ के कारण आज जनता का भरोसा इस विभाग से उठ चुका है। कुछ स्वाभिमानी और ईमानदार पुलिसकर्मी अच्छा करना भी चाहते हैं, तो उच्च अधिकारी उन्हें दबा देते हैं।”
भविष्य की रणनीति: नई व्यवस्था की मांग
अविनाश राजा ने स्पष्ट किया कि समाज को अब एक ऐसी न्याय व्यवस्था की जरूरत है, जहाँ रक्षक ही समाज का दुश्मन न बन जाए। उन्होंने संकल्प लिया कि यदि भविष्य में उन्हें सिस्टम का हिस्सा बनने का अवसर मिला, तो वे पुलिस सुधार और नई व्यवस्था के लिए संसद तक आवाज बुलंद करेंगे।
उन्होंने कहा, “दवा बीमारी के इलाज के लिए होती है, लेकिन अगर मरीज दवा से ही डरने लगे, तो इलाज असंभव है। समाज आज असुरक्षित महसूस कर रहा है, जिसे बदलना अनिवार्य है।”
