ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का जोर, वेनेजुएला समेत नए विकल्पों पर विचार
विदेश मंत्रालय ने ऊर्जा सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत वैश्विक बाजार की स्थितियों के अनुसार तेल आपूर्ति के नए विकल्पों का मूल्यांकन करेगा। वेनेजुएला समेत अन्य देशों से तेल आयात की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
नई दिल्ली : भारत ने कहा है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वह वेनेजुएला समेत किसी भी नए आपूर्ति विकल्प के वाणिज्यिक लाभों का मूल्यांकन करने के लिए तैयार है। भारत ने दोहराया कि वह ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने का पक्षधर है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को यहां साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में एक बार फिर ऊर्जा जरूरतों और लाभकारी मूल्यों को निर्णय का आधार बताया। उन्होंने दोहराया कि भारत आपूर्ति में विविधता लाने का पक्षधर है।

जायसवाल ने भारत-अमेरिका समझौते से जुड़े कई प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रवक्ता ने राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पर कहा, “ऊर्जा आपूर्ति के संबंध में सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से बयान दिया है। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत की रणनीति रही है कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बाजार स्थितियों और बदलते वैश्विक घटनाक्रम के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई जाए। भारत के सभी कदम इसी बात को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं और भविष्य में भी उठाए जाएंगे।”
ट्रंप के वेनेजुएला से तेल खरीद संबंधी दावों पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला ऊर्जा क्षेत्र, व्यापार और निवेश के मामले में लंबे समय से भारत का सहयोगी रहा है। वेनेजुएला वर्ष 2019-20 तक भारत के लिए तेल का एक प्रमुख स्रोत रहा है। बाद में प्रतिबंधों के चलते भारत ने तेल खरीद रोक दी थी। वहीं, भारतीय तेल कंपनियों का वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनियों के साथ पहले से सहयोग रहा है। ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत वेनेजुएला सहित किसी भी नए कच्चे तेल आपूर्तिकर्ता से जुड़े विकल्पों के वाणिज्यिक फायदों का मूल्यांकन करने के लिए तैयार है।
इसके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े प्रश्नों के उत्तर में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वाणिज्य मंत्रालय और वाणिज्य मंत्री के बयानों का संदर्भ लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय और मंत्री इस संबंध में पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।
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