लखनऊ के अलग-अलग चौराहों पर NGO व पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का रोज़ाना विरोध प्रदर्शन, अनशन का ऐलान
नसबंदी और टीकाकरण को बताया स्थायी समाधान
लखनऊ में NGO और पशु अधिकार कार्यकर्ता आवारा कुत्तों को लेकर आए निर्देशों के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पाउंड व्यवस्था समाधान नहीं है और ABC नियमों का पालन ही स्थायी उपाय है। मांगें नहीं माने जाने पर अनशन की चेतावनी दी गई है।
लखनऊ : लखनऊ में पशु कल्याण संस्थाएँ आसरा द हेल्पिंग हैंड्स और पॉसम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में तथा पशु अधिकार कार्यकर्ता चारु खरे, अनु बोस, विशाखा चटर्जी, राहुल वर्मा, अलवीना, पूर्णा खरे, सोमिल श्रीवास्तव सहित अन्य पशु प्रेमियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर हाल ही में आए निर्देशों के विरोध में लखनऊ के विभिन्न चौराहों पर रोज़ाना शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर लगातार सुनवाई चल रही है। हालिया सुनवाई के दौरान सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाकर उन्हें पाउंड एवं शेल्टर में रखने संबंधी जो निर्देश सामने आए हैं, वे न तो व्यावहारिक हैं और न ही वैज्ञानिक अथवा मानवीय। इन्हीं कारणों से लखनऊ में रोज़ाना विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

सभी संगठनों की मुख्य मांग है कि सरकार और प्रशासन द्वारा एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का सख्ती से पालन किया जाए, जो कानूनन मान्य और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध पद्धति है।
फीडिंग के वैज्ञानिक कारणों पर प्रकाश डालते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि नियमित व नियंत्रित फीडिंग से कुत्ते अपने क्षेत्र में स्थिर रहते हैं, आक्रामकता कम होती है, कूड़ा फैलाने की प्रवृत्ति घटती है और नसबंदी व टीकाकरण के बाद वे समाज के लिए सुरक्षित रहते हैं। भूखे जानवर अधिक तनावग्रस्त और हिंसक हो सकते हैं, जिससे मानव-पशु संघर्ष बढ़ता है।
चारु खरे, आसरा द हेल्पिंग हैंड्स से जुड़ी पशु अधिकार कार्यकर्ता ने कहा, “आवारा कुत्तों को पाउंड में बंद करना समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और गंभीर बनाना है। ABC नियमों के अनुसार नसबंदी, टीकाकरण और सह-अस्तित्व ही एकमात्र वैज्ञानिक व मानवीय रास्ता है। यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो हम अनशन पर बैठने को बाध्य होंगे।”
अनु बोस, पशु कल्याण कार्यकर्ता ने कहा, “देश में पहले से पशु कल्याण कानून मौजूद हैं, ज़रूरत है उनके सही क्रियान्वयन की। पाउंड और शेल्टर बनाना ज़मीनी हकीकत से दूर और पशुओं के प्रति क्रूर रवैया है।”
विशाखा चटर्जी, पॉसम फाउंडेशन से जुड़ी पशु अधिकार कार्यकर्ता ने कहा, “पाउंड व्यवस्था दिखावटी समाधान है, जिससे बीमारियाँ फैलती हैं और जानवरों की मौत का खतरा बढ़ता है। सुप्रीम कोर्ट से आग्रह है कि वैज्ञानिक तथ्यों और ज़मीनी अनुभवों को ध्यान में रखते हुए फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।”
कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि यह फैसला रिवर्स नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा अनशन पर बैठने का सामूहिक निर्णय लिया जा चुका है।
यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य समाज में मानव और पशु के सह-अस्तित्व की रक्षा करना है।
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