राजमहल की पवित्र धरा पर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का संगम
आस्था, साधना और सनातन संस्कृति का प्रतीक है राजकीय माघी मेला
राजमहल का राजकीय माघी मेला श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक परंपरा का बड़ा संगम बन गया है। गंगा तट पर आयोजित इस मेले में कल्पवासी, साधु-संत और श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
साहिबगंज : राजमहल की पावन धरा पर गंगा नदी के तट पर आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से ओत-प्रोत राजकीय माघ मेले की शुरुआत 1 फरवरी से हो चुकी है। मेले का उद्घाटन उपायुक्त हेमंत सती और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ मेले का समापन होगा।

माघ माह में स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस वर्ष मेले में छह प्रमुख स्नान पर्व रहे, जिनमें पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा के स्नान संपन्न हो चुके हैं, जबकि अंतिम और प्रमुख स्नान महाशिवरात्रि 15 फरवरी को होगा। इन पर्वों के दौरान मेला क्षेत्र श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा दिखाई देता है।
इस वर्ष लगभग 50 बीघा क्षेत्र में मेला बसाया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए 20 पुलिस पोस्ट स्थापित की गई हैं तथा दर्जनों पेट्रोलिंग टीमें तैनात हैं। 500 से अधिक पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। इसके अलावा दो अस्थायी फायर स्टेशन बनाए गए हैं और पूरे क्षेत्र में 50 से अधिक एआई आधारित कैमरों से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
उपायुक्त हेमंत सती और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह मेले की तैयारियों और व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं को सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा और यातायात सहित सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।
राजमहल का यह राजकीय माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, साधना और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। आधुनिक व्यवस्थाओं और तकनीकी निगरानी के साथ यह मेला सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
पुराणों में माघ माह को देव मास कहा गया है और इस दौरान गंगा स्नान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान को विशेष फलदायी बताया गया है। राजमहल की उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर लगने वाला यह मेला सदियों से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए है। आदिवासियों के महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध इस मेले में झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्यों और नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष रूप से सफा होड़ जनजाति के श्रद्धालु अपने आराध्य भगवान शिव की उपासना में पूरी श्रद्धा से शामिल होते हैं।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
