बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, यह सरकार की नीति-नीयत और चरित्र का चेहरा: संत कुमार घोष

बजट को बताया सरकार के चरित्र का प्रतिबिंब

बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, यह सरकार की नीति-नीयत और चरित्र का चेहरा: संत कुमार घोष
संत कुमार घोष (फाइल फोटो)

साहिबगंज में हिंदू धर्म रक्षा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष संत कुमार घोष ने केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए कहा कि विकास का आकलन केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में आए सुधार से होना चाहिए।

साहिबगंज। हिंदू धर्म रक्षा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष संत कुमार घोष ने संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं, परियोजनाओं और घोषणाओं के नाम भले बड़े हों, लेकिन यदि उनका क्रियान्वयन ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ नहीं होता, तो वे जनता के साथ छल से अधिक कुछ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार की नीति, नीयत और चरित्र का प्रतिबिंब होता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और मेहनतकश वर्गों के हित में काम कर रही है या बड़े पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।

संत कुमार घोष ने सवाल उठाया कि आत्मनिर्भर भारत की बात करने वाली सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र को कितना मजबूत किया है और क्या यह बजट बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के कल्याणकारी संविधान की भावना के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल शासन का दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानव गरिमा की गारंटी है।

उन्होंने आगे कहा कि बजट का मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि पिछले वर्ष किए गए वादों और घोषणाओं को कितना पूरा किया गया। क्या वे केवल औपचारिकता बनकर रह गए या वास्तव में जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया? जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है।

उन्होंने कहा कि विकास का आकलन केवल जीडीपी से नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में आए वास्तविक सुधार से होना चाहिए। क्या बेरोजगारी कम हुई? क्या किसानों की आय बढ़ी? क्या शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सामाजिक सुरक्षा आम जनता तक पहुंची? यदि इन सवालों के जवाब नकारात्मक हैं, तो किसी भी बजट को सफल नहीं कहा जा सकता।

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केंद्रीय अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह बजट के दावों पर श्वेत पत्र जारी कर बताए कि विभिन्न योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक कितना पहुंचा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में अच्छे दिन लाना चाहती है, तो उसे केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण नीति और प्रभावी क्रियान्वयन से इसे सिद्ध करना होगा।

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Edited By: Mohit Sinha
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Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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