एक दिन में दो 'प्रलय'! भारत का सर्जिकल टेस्ट, घातक गर्जना से कांपा दुश्मन
सीमा पर नहीं, अब मन में डर होगा, भारत की ‘प्रलय’ से आई खामोशी
स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ के दो परीक्षण एक ही दिन में सफल, रक्षा तैयारियों में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग
नई दिल्ली: भारत ने सोमवार को रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, जब उसने स्वदेशी रूप से विकसित की गई अल्प दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' के दो लगातार परीक्षण सफलतापूर्वक किए। इन परीक्षणों को ओडिशा के तट से किया गया और दोनों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता के साथ भेदा। यह परीक्षण सिर्फ तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और युद्ध-तैयार मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई ‘प्रलय’ मिसाइल सतह से सतह पर मार करने वाली प्रणाली है, जो 150 से 500 किलोमीटर तक की दूरी तक लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। इसमें अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम, सॉलिड फ्यूल और इनर्शियल गाइडेंस जैसी तकनीकें शामिल हैं, जो इसे सटीक और घातक बनाती हैं।
https://twitter.com/DRDO_India/status/1950093067668586541

‘प्रलय’ मिसाइल को भारतीय सेना की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है और इसे चीन और पाकिस्तान जैसी सीमाओं पर तैनात करने की योजना है। इसके तेज रिएक्शन टाइम और गहन मारक क्षमता इसे भारत की युद्ध रणनीति में अहम भूमिका दिलाती है।
पेलोड: यह मिसाइल 350 से 700 किलोग्राम वजन का एक पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है, जिससे यह कमांड सेंटर, लॉजिस्टिक हब और एयरबेस जैसे प्रमुख दुश्मन ठिकानों पर सटीक हमला कर सकती है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के प्रति भारत की तत्परता को दर्शाता है। साथ ही यह परीक्षण उन देशों के लिए भी एक कड़ा संदेश है, जो भारत की सीमाओं की संप्रभुता पर आंख उठाकर देखते हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत ऐसे प्रयास देश की रक्षा तैयारियों को न केवल आधुनिक बना रहे हैं, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत को एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित भी कर रहे हैं।
गतिशीलता: दोहरे लॉन्चर सेटअप वाले एक उच्च-गतिशीलता वाहन पर स्थापित, प्रलय को संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज़ी से तैनात किया जा सकता है। इसे भारत की "पहले इस्तेमाल न करें" परमाणु नीति के तहत पारंपरिक हमलों के लिए विकसित किया गया है, जो इसकी विशिष्टता को और बढ़ाता है। इसका मतलब है कि यह मिसाइल बिना परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के भी शक्तिशाली प्रतिक्रिया दे सकती है।
इससे पहले भी DRDO ने कई अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों का सफल परीक्षण किया है, लेकिन ‘प्रलय’ का यह दोहरा परीक्षण अपने आप में खास है, क्योंकि यह त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता के साथ कम समय में दुश्मन पर निर्णायक प्रहार की शक्ति देता है। यह मिसाइल भविष्य में भारतीय सेना के प्रमुख हथियारों में शामिल हो सकती है।
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