राज्यसभा क्या है? और कैसे चुने जाते हैं सदस्य? जानें योग्यता, शक्तियां और चुनाव प्रक्रिया
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के लिए राज्यसभा चुनाव एक बड़ा राजनीतिक परीक्षण साबित हो सकते हैं। बिहार की छह सीटें दांव पर हैं, जहां जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की ताकत का आकलन होगा।

राज्यसभा, 'राज्यों की परिषद' के नाम से जाना जाता है, भारतीय संसद का स्थायी सदन है। यह कभी भंग नहीं होता और हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार, इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, जिसमें 238 राज्य-संघ क्षेत्रों से चुने जाते हैं और 12 राष्ट्रपति द्वारा नामित। बिहार को 16 सीटें मिली हैं, जबकि उत्तर प्रदेश को 31।
सदस्य बनने की पात्रता और चुनाव प्रक्रिया
राज्यसभा सदस्य बनने के लिए अनुच्छेद 84 के तहत उम्मीदवार भारत का नागरिक, 30 वर्ष से अधिक आयु का और निर्धारित शपथ लेने वाला होना चाहिए। कार्यकाल छह वर्ष का होता है। चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (एसटीवी) प्रणाली से होता है। बिहार जैसे राज्य में जनसंख्या आधारित फॉर्मूला से सीटें तय होती हैं। हाल के चुनावों में खुले बैलट सिस्टम से क्रॉस-वोटिंग के मुद्दे उभरे हैं, जहां विधायक अपनी पार्टी को बैलट दिखाते हैं, लेकिन दलबदल कानून सीमित रूप से लागू होता है।
राज्यसभा की शक्तियां: संघीय संतुलन
राज्यसभा लोकसभा विधेयकों की समीक्षा करती है और नीतिगत निरंतरता सुनिश्चित करती है। इसके विशेष अधिकार:
- अनुच्छेद 249: राज्य सूची पर संघ को कानून बनाने की शक्ति।
- अनुच्छेद 312: अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन।
यह आपातकाल या संशोधनों में लोकसभा के समान शक्तियां रखती है, जो राज्यों के हितों की रक्षा करती है।
चुनावों का महत्व: बिहार में बदलाव की लहर
10 राज्यों में 37 सीटों के इन चुनावों का असर संसद की संरचना और नीतियों पर पड़ेगा। बिहार में नीतीश कुमार की रणनीति गठबंधन की मजबूती पर निर्भर करेगी, जो राष्ट्रीय शासन को प्रभावित कर सकती है।
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