अंधविश्वास पर हर साल 2 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं थम रही मौतें; जानिए 4 साल में कितनी जानें गईं
कई जिलों में लगातार बढ़ रहे मामले
समृद्ध डेस्क: झारखंड में अंधविश्वास आज भी एक बड़ी सामाजिक समस्या बना हुआ है, जहां हर साल कई निर्दोष लोग इसकी भेंट चढ़ जाते हैं. सरकारी स्तर पर जागरूकता और रोकथाम के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सके हैं. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में अंधविश्वास के कारण औसतन हर साल करीब 18 लोगों की जान चली जाती है, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है.
| जिला | 2025 | 2024 | 2023 | 2022 | कुल |
|---|---|---|---|---|---|
| रांची | 0 | 2 | 2 | 3 | 7 |
| गिरिडीह | 0 | 1 | 0 | 2 | 3 |
| दुमका | 1 | 0 | 1 | 3 | 5 |
| जामताड़ा | 0 | 0 | 1 | 0 | 1 |
| देवघर | 1 | 0 | 0 | 0 | 1 |
| साहिबगंज | 0 | 0 | 1 | 0 | 1 |
| पाकुड़ | 1 | 1 | 0 | 0 | 2 |
| चतरा | 0 | 1 | 2 | 0 | 3 |
| खूंटी | 1 | 0 | 1 | 3 | 5 |
| गुमला | 2 | 2 | 2 | 3 | 9 |
| सिमडेगा | 0 | 0 | 0 | 2 | 2 |
| लोहरदगा | 0 | 1 | 0 | 2 | 3 |
| पश्चिमी सिंहभूम | 2 | 4 | 5 | 2 | 13 |
| सरायकेला | 1 | 0 | 2 | 1 | 4 |
| पूर्वी सिंहभूम | 1 | 0 | 0 | 0 | 1 |
| पलामू | 0 | 1 | 1 | 1 | 3 |
| लातेहार | 0 | 0 | 1 | 2 | 3 |
| गढ़वा | 2 | 1 | 1 | 2 | 6 |
| हजारीबाग | 1 | 1 | 0 | 1 | 3 |
| कुल | 11 | 15 | 20 | 27 | 73 |
बजट की 60% राशि बैनर और नुक्कड़ नाटक पर खर्च
दैनिक भास्कर के रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड सरकार अंधविश्वास और डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए हर वर्ष लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च करती है. इसके तहत जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करने जैसी गतिविधियां चलाई जाती हैं. बावजूद इसके, कई दूरदराज के इलाकों में अशिक्षा, गरीबी और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोग आज भी झाड़-फूंक और टोना-टोटका जैसी मान्यताओं पर विश्वास करते हैं.

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