बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधकर्ताओं की बड़ी सफलता, दिमाग से चलेगी व्हीलचेयर
क्वांटम-एन्हांस्ड डीप लर्निंग मॉडल पर आधारित सिस्टम
Birla Institute of Technology Mesra के शोधकर्ताओं ने एक उन्नत ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस प्रणाली विकसित की है, जिससे दिमागी संकेतों के जरिए व्हीलचेयर को नियंत्रित किया जा सकता है। यह तकनीक EEG आधारित है और क्वांटम-एन्हांस्ड डीप लर्निंग मॉडल का उपयोग करती है।
रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी उन्नत ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस प्रणाली विकसित की है, जो दिमाग के विद्युत संकेतों को वास्तविक समय में व्हीलचेयर चलाने के निर्देशों में बदल सकती है। यह प्रणाली क्वांटम-एन्हांस्ड डीप लर्निंग मॉडल पर आधारित है। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल न्यूरोसाइंस (एल्सेवियर, वॉल्यूम 591, नवंबर 2025) में प्रकाशित किया गया है।
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक को रीढ़ की हड्डी की चोट, स्ट्रोक, एएलएस (एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) और सेरेब्रल पाल्सी जैसी स्थितियों से जूझ रहे लोगों के लिए सहायक तकनीक के रूप में देखा जा रहा है, जहां स्वतंत्र रूप से चलना-फिरना एक बड़ी चुनौती होता है। ईईजी आधारित प्रणालियां खास तौर पर उपयोगी मानी जाती हैं, क्योंकि ये बिना शरीर में कोई हस्तक्षेप किए दिमाग के संकेतों को रिकॉर्ड कर सकती हैं और वास्तविक समय में प्रतिक्रिया देने में सक्षम होती हैं। हालांकि, इन संकेतों को सही तरीके से पहचानना अभी भी चुनौतीपूर्ण रहता है, क्योंकि इनमें शोर, अलग-अलग व्यक्तियों के बीच भिन्नता और तेज प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है।

परीक्षण के दौरान इस प्रणाली ने 92.71 प्रतिशत सटीकता हासिल की और औसत प्रतिक्रिया समय 77.6 मिलीसेकंड रहा, जिससे लगभग वास्तविक समय में व्हीलचेयर को नियंत्रित करना संभव हुआ। इसमें गलत संकेत देने की दर 2.8 प्रतिशत रही, जो पारंपरिक मॉडलों की तुलना में कम है। इस मॉडल का परीक्षण अंतरराष्ट्रीय डाटा सेट पर भी किया गया, जहां इसने 90.23 प्रतिशत सटीकता प्राप्त की। यह मॉडल कम संसाधनों में भी काम कर सकता है, जिससे इसे पोर्टेबल उपकरणों में उपयोग करना आसान हो जाता है।
इस अध्ययन के लिए ईईजी डाटा बीआईटी मेसरा में 8-चैनल वायरलेस प्रणाली के माध्यम से एकत्र किया गया। इसमें ऐसे प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिन्हें पहले इस प्रकार के प्रयोग का अनुभव नहीं था, जिससे इसके व्यावहारिक उपयोग की संभावना और मजबूत होती है। प्रतिभागियों को दिमाग में बाएं हाथ, दाएं हाथ की गति और आराम की स्थिति की कल्पना करने को कहा गया, जिन्हें क्रमशः व्हीलचेयर के बाएं मुड़ने, दाएं मुड़ने और रुकने के निर्देशों से जोड़ा गया।
विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रभात कुमार उपाध्याय ने कहा, “ईईजी आधारित प्रणालियां बिना किसी शारीरिक हस्तक्षेप के काम करती हैं, तेजी से प्रतिक्रिया देती हैं और किफायती भी हैं। हमारा प्रयास इस तकनीक को और अधिक भरोसेमंद और सरल बनाना है, ताकि इसे प्रयोगशाला से बाहर वास्तविक जीवन में उपयोग किया जा सके।”
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में क्वांटम तकनीक का उपयोग सिमुलेशन के रूप में किया गया है और भविष्य में इसे वास्तविक क्वांटम सिस्टम पर परखा जाएगा।
इस प्रणाली का एक कार्यशील प्रोटोटाइप बीआईटी मेसरा के ईईई विभाग की प्रयोगशाला में तैयार किया जा चुका है, जिसने वास्तविक परिस्थितियों में 80 प्रतिशत से अधिक सटीकता दिखाई है। यह प्रणाली वायरलेस तरीके से व्हीलचेयर के मोटर नियंत्रण तक संकेत भेजती है, जिससे उपयोगकर्ता के विचारों के अनुसार तुरंत प्रतिक्रिया मिलती है।
इस शोध को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा परियोजना संख्या 2021-16010 के अंतर्गत सहयोग प्राप्त हुआ है, जिसके प्रमुख अन्वेषक डॉ. उपाध्याय हैं। इस परियोजना का दीर्घकालिक उद्देश्य ऐइलेक्ट्रिकलसी विश्वसनीय, तीव्र तथा प्रभावी ब्रेन-कंट्रोल्ड सहायक प्रणालियों का विकास करना है, जो वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में सक्षम रूप से कार्य कर सकें तथा विशेष रूप से शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए उपयोगी सिद्ध हों।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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