Koderma News: 90 महिलाओं ने लाह उत्पादन से लिखी स्वावलंबन की नई इबारत
घरेलू कामकाज के साथ 'कामकाजी महिला' होने का गौरव
कोडरमा के महुआदोहर गांव की 90 महिलाओं ने माईका उद्योग बंद होने के बाद पलायन के बजाय लाह उत्पादन को अपनी ताकत बनाया है। राष्ट्रीय झारखंड सेवा संस्थान और नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षित ये महिलाएं आज ₹50 से ₹500 तक की आकर्षक चूड़ियाँ बनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। मुख्यमंत्री कुटीर उद्योग योजना से प्राप्त ₹5 लाख की सहायता और प्रधानमंत्री द्वारा सराहे गए इस गांव के हौसले ने महिलाओं को घरेलू कामकाज के साथ 'कामकाजी' होने का नया गौरव दिया है। शून्य से शिखर तक का यह सफर न केवल उनके जीवन स्तर को सुधार रहा है, बल्कि समाज के लिए महिला सशक्तिकरण की एक अनुपम मिसाल भी पेश कर रहा है।
कोडरमा: आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है और आज हम उन तमाम महिलाओं को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने समाज के लिए बेहतर काम किया हो। कोडरमा के चंदवारा प्रखंड स्तिथ महुआदोहर गांव में महिलाएं लाह के उत्पादन से लेकर लाह से उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भरता की राह गढ़ रही है। राष्ट्रीय झारखंड सेवा संस्थान के सचिव मनोज दांगी ने बताया कि महिलाओं ने अपने दम पर शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है और यह सिलसिला अनवरत जारी है।

लाह उत्पादन से जुड़ने का फैसला इन महिलाओं ने ऐसे समय में लिया जब इनका महुआदोहर गांव माईका उद्योग के बंद होने के बाद पलायन के दौर से गुजर रहा था। बहरहाल इस गांव की महिलाओं ने खुद को हुनरमंद बनाने के लिए एकजूटता की राह चुनी। आज गांव की तमाम महिलाएं इस उद्योग के जरिए एकजुट है और घरेलू कामकाज के साथ कामकाजी महिला होने का भी गौरव हासिल कर रही है।
फिलहाल ये महिलाएं 50 रुपये से लेकर 500 तक की लाह की बनी चूड़ियां तैयार कर रही है। बड़ा बाजार मिल जाए तो इन महिलाओं के द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की डिमांड भी निसंदेह बढ़ जाएगी, जिससे इनका मुनाफा भी बढ़ेगा। फिलहाल इनके हौसलों को देखते हुए मुख्यमंत्री कुटीर उद्योग योजना के तहत इस समूह को 5 लाख रुपये का एक किट भी दिया गया है। इसके अलावे ये वही महुआदोहर गांव है जहां के रानी मिस्त्री की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं।
