250 बीघा खेत में सिचाई संकट, पानी की कमी बनी बड़ी चुनौती
किसानों की गोभी फसल सिचाई की कमी से प्रभावित, डीप बोरिंग की मांग तेज
मसलिया प्रखंड के बरमसिया और कपशियो के युवा किसानों ने पलायन छोड़कर गोभी की खेती को अपनाया है। 250 बीघा में दस लाख पौधों की फसल उगाई गई है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से किसान चिंतित हैं और डीप बोरिंग की मांग कर रहे हैं।
दुमका : मसलिया प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बास्कीडीह पंचायत के बरमसिया और कपशियो मौजा के रैयतों के युवाओं ने पलायन छोड़ इन दिनों बड़े पैमाने पर गोभी की खेती कर आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग अपनाया है। लेकिन उनके आत्मनिर्भरता में प्रसाशन की ओर से आर्थिक सहयोग और सिचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी नही मिलने से बाधा उत्पन्न कर रही है। यहा के युवा किसानों के माने तो उनके दवारा दस लाख गोभी का पौधा लगभग दो सौ पचास बीघा जमीन में लगाया गया है, उस अनुपात में सिचाई के लिए पानी पर्याप्त नही है। हालांकि वर्तमान समय में बहियार व अन्य जलाशयों से पानी संग्रहित कर किसी तरह से सिंचाई कर रहे हैं जो कुछ दिनों में समाप्त हो जायेगी। और उन्हें पानी की घोर किल्लतों का सामना करने पड़ेंगे जिसका व्यापक असर उनके खून पसीने से उगाया हुआ गोभी फसल पर पढेंगे।जिसको लेकर युवा किसानों ने चिंता जाहिर करते हुए प्रसाशन डीप बोरिंग करवाने का मांग किया है।

क्या कहते हैं खेतिहर किसान
किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से कई प्रकार योजनाओं से लाभवन्ति कर सशक्त कर रहे हैं लेकिन यहा के किसान उन योजनाओं से वंचित हैं: रंजीत पंडित, किसान बरमसिया। हमलोगों ने पलायन छोड़ कर खेती करने की मार्ग को अपनाया है लेकिन पैसे की कमी से अच्छी तरह से खेती नही कर पाते हैं। कृषि लोन के लिए बैंक जाते हैं लेकिन हमको लोन नही देते हैं।: जगरनाथ पंडित, किसान बरमसिया।
यहा के किसान बारह महीने खेती करते हैं, जिनके लिए मनरेगा योजना के तहत दो-चार कूप निर्माण कराया गया है लेकिन यह प्रयाप्त नही है। यदि प्रसाशन की ओर से पानी की पर्याप्त व्यवस्था कराया जाये तो हमे आत्मनिर्भर बनने से कोई रोक नही पाएंगे।: राजकुमार पंडित, किसान बरमसिया।
पानी के अभाव में प्रतेक वर्ष बड़े पैमाने पर फसल नष्ट हो जाते हैं और हमें काफी नुकसान उठाने पढ़ते हैं। यहा के किसानों को पर्याप्त मात्रा में सिचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिल जाये तो हम नुकसान से बच जाएंगे।: अंनत पंडित, किसान बरमसिया।
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