Dumka News: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष में हिन्दू सम्मेलन का किया गया आयोजन
प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा: "जातिगत विभाजन की साजिशों से बचकर एक रहें हिंदू"
दुमका के नेशनल स्कूल मैदान में आयोजित 'हिन्दू सम्मेलन' में आरएसएस के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने समाज को जातिगत भेदभाव भूलकर एकजुट होने और स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया। इस दौरान संथाल परगना में बदलती डेमोग्राफी और घुसपैठ जैसी चुनौतियों पर चिंता जताते हुए जनजातीय समाज को सनातन का अभिन्न हिस्सा बताया गया। पूज्य स्वामी आत्मानंद पुरी सहित अन्य वक्ताओं ने रामायण-महाभारत के आदर्शों, नारी शक्ति के सम्मान और सामाजिक समरसता के जरिए राष्ट्र को सशक्त बनाने पर जोर दिया।
दुमका: नेशनल स्कूल, दुधानी के खेल मैदान में रविवार को सकल हिंदू समाज के द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उदघाटन दीप प्रज्ज्वलित कर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के झारखण्ड प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, विशिष्ट अतिथि पूज्य स्वामी आत्मानंद पूरी महाराज, इंग्लिश मरांडी और अंजना भुवानियां के द्वारा किया गया। गोपाल शर्मा ने हिंदू समाज के एकजुटता का आह्वाहन करते हुए कहा कि हिन्दू समाज को जाति–जाति में विभाजित करने की साजिश निरंतर की जा रही है;जिससे बचने की आवश्यकता है। जब किसी भी जाति के लोग जगन्नाथपुरी मन्दिर या अयोध्या में प्रभु श्री राम के दर्शनार्थ जाते हैं तो किसी से जाति नहीं पूछी जाती है।

ऐसे साजिशकर्ताओं से समाज को बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच–प्रण की चर्चा करते हुए सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी आचरण, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य के मानबिन्दुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति में शास्त्र और धर्म के रक्षार्थ शस्त्र दोनों को धारण करने की मान्यता रही है। भारत एक ओर जहां परमाणु संपन्न देश है वहीं शांति के स्थापना में इसकी महत्वपूर्ण भागीदारी रहा है। वर्तमान वैश्विक परिवेश में भारत की महती भूमिका बनी हुई है।
भारत में राष्ट्रवादी भावना से ओत–प्रोत सरकार के नेतृत्व में सेना को सशक्त बनाया गया है, जिससे आज आम भारतीय गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने समस्त हिंदुओं से मिलजुलकर रहने और स्वदेशी को अपनाकर भारत के विकास में योगदान करने का आग्रह किया। पूज्य स्वामी आत्मानंद पूरी ने वैदिक परम्परा के अनुरूप सद आचरण के व्यवहार को आत्मसात करने के लिए हिंदू समाज के लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य कुसंस्कृति से भारतीयों को बचने की जरूरत है। ऐसा नहीं होने पर समाज के बिखरने का खतरा मंडरा रहा है। परिवार में आपसी विवाद से परिवार टूट रहा है। ऐसे में रामायण, महाभारत जैसे महाकाव्य के दृष्टांत को देख–सुनकर लोगों में कैसा आचरण होना चाहिए यह सीखा जा सकता है। भागवत गीता के श्रवण से हिंदू समाज को सीख लेने की जरूरत है। हिंदू समाज से स्वामी जी ने एकजुटता का परिचय देने अनुरोध किया।
इंग्लिश मरांडी ने जनजातीय समाज को सनातन संस्कृति का हिस्सा बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम चाहते तो अयोध्या से विशाल सेना मंगाकर अन्याय के विरुद्ध लड़ाई कर सकते थे लेकिन उन्होंने जनजातीय वनवासियों के साथ मिलकर धर्म पताका को फहराया। आदिवासी प्रकृति पूजक हैं। हिंदू धर्म में प्रकृति की पूजा होती है।
पीपल वृक्ष, बरगद वृक्ष, शाल वृक्ष और तुलसी की पूजा पुरातन काल से होती आई है। हमें अपनी परंपरा को संजोए रखने की आवश्यकता है। सूर्य की उपासना सभी करते हैं। उन्होंने समस्त हिंदुओं को एकजुट रहने के लिए प्रेरित किया। अंजना भुवानियां ने हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्दू मान्यता के अनुसार यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता का भाव है। उन्होंने नारी शक्ति से अनुरोध किया कि परिवार को संजोए रखने में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भागीदारी है। अतः वे सकारात्मक तरीके से समाज की एकजुटता में योगदान दें। मंच संचालन कृष्णम भुवानियां और डॉ०संजीव कुमार ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का आयोजन सकल हिंदू समाज के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में हिन्दू समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में सहभागी बने।
