“तपस्या”: मां के संघर्ष से IPS बनी बेटी की प्रेरक कहानी
बेटी की पढ़ाई के लिए घर छोड़ने का साहस
“तपस्या” एक मार्मिक लघुकथा है, जो एक मां के संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। समाज की रूढ़िवादी सोच के खिलाफ लड़ते हुए मीना अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए घर छोड़ देती है।
आज मीना बहुत खुश थी, उसकी वर्षों की तपस्या सफल हो गयी थी।उसकी बेटी कविता आइ पी एस की ट्रेनिंग ख़त्म करके घर लौट रही थी।सुबह से मीना रसोई में कविता के पसन्द के व्यंजन बनाने में व्यस्त थी। बीच-बीच में अतीत के साये मीना के मानस पटल पर तैर रहे थे,जिसे झटकने की वह नाकाम कोशिश करती रही। फिर भी आज जिन ज़ंजीरों से आज़ाद हुई थी वे ज़ंजीर खींच कर उसे अतीत की ओर ले गयी।

शादी के पाँच साल बाद मीना का मातृत्व पूरा हुआ।परन्तु बिटिया के आगमन की ख़बर सुनते ही पूरे घर में सन्नाटा छा गया….सब बेटे की आस लगाए बैठे थे। अस्पताल से घर आने के बाद मीना और उसकी छोटी बच्ची पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। दिन गुजरते गये कविता पाँच साल की हो गयी( मीना ने ही बेटी का नाम कविता रखा था)मीना बेटी का दाख़िला स्कूल में करवाना चाह रही थी, परन्तु पति सास ससुर ने विरोध किया कि लड़की पढ़कर क्या करेगी। परन्तु मीना अपनी बेटी को पढ़ा-लिखा कर अपने पैरों पर खड़ी करना चाह रही थी, ताकि उसकी ज़िंदगी को भी ज़ंजीरों में न जकड़ा जाये।
आख़िर मीना घर से निकल गयी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए।एक सहेली ने आश्रय दिया और एक महीना होते-होते मीना ने एक सिलाई मशीन लेकर ज़िंदगी की गाड़ी खींचने लगी। बेटी की अच्छी परवरिश के लिए रात-दिन मेहनत करती हुई आज बेटी को आइ पी एस बना दिया।
तभी दरवाज़े पर घंटी बजी और मीना वर्तमान में लौट आयी….सामने आइ पी एस बेटी को देखकर ख़ुशी से आँखें भर आयी। माँ-बेटी गले लगकर, तपस्या पूरी होने पर मुस्कुरा दी….
लेखिका: रश्मि सिन्हा
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
