कोयले की धरती बेरमो प्रखंड से चेवनिंग स्कॉलर तक: बैजनाथ पासवान का यूके तक प्रेरक सफर

बैजनाथ की शिक्षा यात्रा काफी विविध

कोयले की धरती बेरमो प्रखंड से चेवनिंग स्कॉलर तक: बैजनाथ पासवान का यूके तक प्रेरक सफर
बैजनाथ पासवान(फाइल फोटो)

बोकारो/औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद जिले से आने वाले बैजनाथ कुमार पासवान ने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है. बचपन झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो प्रखंड में बीता, जहाँ चारों ओर कोयले की खदानें थीं और बिजली, पानी व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएँ तक सीमित थीं. इन्हीं चुनौतियों ने उनके मन में ऊर्जा, जलवायु और सामाजिक न्याय को लेकर गहरी संवेदना पैदा की. यही सोच उन्हें आज यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स तक ले गई, जहाँ वे चेवनिंग स्कॉलरशिप के तहत पूरी तरह वित्तपोषित मास्टर्स प्रोग्राम (MSc in Energy and Climate Policy) कर रहे हैं.

बैजनाथ की शिक्षा यात्रा काफी विविध रही है. उन्होंने उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से बीटेक (फूड टेक्नोलॉजी) किया, फिर रांची के XISS से ग्रामीण विकास में MBA और इसके बाद दिल्ली स्थित IIFT और NLU से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यावरण कानून में डिप्लोमा कोर्स किए. लेकिन शिक्षा से अधिक प्रेरणादायक उनका जमीनी अनुभव रहा है. उन्होंने 12 वर्षों तक बिहार में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और नीति विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में काम किया है. BRLPS (जीविका), बिहार विकास मिशन जैसे संस्थानों के माध्यम से उन्होंने नीतिगत योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाई.

चेवनिंग स्कॉलरशिप के लिए उन्होंने तीन बार आवेदन किया. पहले प्रयास में आवेदन अस्वीकृत हुआ, दूसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुँचे लेकिन अंतिम चयन नहीं हुआ, और तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिली. इस सफलता के पीछे उन्होंने गहन आत्ममंथन, रणनीतिक तैयारी और अपने अनुभवों को प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने की कला को श्रेय दिया. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स के प्रतिष्ठित SPRU विभाग को इसलिए चुना क्योंकि यह ऊर्जा नीति और जलवायु न्याय पर केंद्रित है — जो उनके करियर लक्ष्य से जुड़ा हुआ है.

IELTS की तैयारी उन्होंने नौकरी के साथ-साथ ऑनलाइन संसाधनों और अभ्यास से की. चेवनिंग आवेदन में STAR तकनीक के माध्यम से उन्होंने अपने नेतृत्व अनुभवों को स्पष्ट किया और दिखाया कि कैसे उनका पिछला कार्य अनुभव भविष्य में भारत की ऊर्जा नीति और सतत विकास लक्ष्यों के लिए फायदेमंद हो सकता है.

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बैजनाथ कुमार पासवान मानते हैं कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्कॉलरशिप में सफलता पाने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपनी यात्रा, उद्देश्य और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझे और प्रस्तुत करे. उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि अगर संकल्प और दिशा स्पष्ट हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते.

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Edited By: Sujit Sinha
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सुजीत सिन्हा, 'समृद्ध झारखंड' की संपादकीय टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं, जहाँ वे "सीनियर टेक्निकल एडिटर" और "न्यूज़ सब-एडिटर" के रूप में कार्यरत हैं। सुजीत झारखण्ड के गिरिडीह के रहने वालें हैं।

'समृद्ध झारखंड' के लिए वे मुख्य रूप से राजनीतिक और वैज्ञानिक हलचलों पर अपनी पैनी नजर रखते हैं और इन विषयों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

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