महाप्रलय की दस्तक: रूस के महाभूकंप के बाद प्रशांत महासागर में सुनामी का कहर
2011 की यादें फिर ताज़ा: रूस में भीषण भूकंप, जापान में फुकुशिमा का डर
रूस के कामचटका प्रायद्वीप में 8.8 तीव्रता के भूकंप ने प्रशांत महासागर में सुनामी की लहरों को जन्म दिया है, जिससे जापान में 2011 की फुकुशिमा त्रासदी की दर्दनाक यादें फिर से ताज़ा हो गई हैं और पूरे प्रशांत क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
समृद्ध डेस्क: बुधवार को रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र, कामचटका प्रायद्वीप के निकट रिक्टर पैमाने पर 8.8 की तीव्रता वाले एक विनाशकारी भूकंप ने সমগ্র प्रशांत महासागर को दहला दिया। इस शक्तिशाली भू-गर्भीय हलचल के कारण समुद्र में विनाशकारी सुनामी की लहरें उठीं, जिन्होंने रूस के तटीय इलाकों से लेकर जापान और उससे आगे तक अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। इस घटना ने न केवल बड़े पैमाने पर बचाव कार्यों को सक्रिय कर दिया है, बल्कि विशेष रूप से जापान में 2011 की फुकुशिमा परमाणु त्रासदी की भयावह स्मृतियों को भी पुनर्जीवित कर दिया है।
भूकंप का केंद्र रूस के प्रशांत तट के पास होने के कारण सबसे पहले इसका प्रभाव वहीं देखने को मिला। रूस के कुरील द्वीपों और सखालिन क्षेत्र में कई मीटर ऊंची लहरें टकराईं, जिससे तटीय इलाकों में पानी भर गया और इमारतों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय प्रशासन ने तत्काल आपातकाल की घोषणा करते हुए लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने का आदेश दिया।

2011 के बाद जापान में फिर अफरा-तफरी
हालांकि इन लहरों की ऊंचाई अभी कम थी, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बाद में आने वाली लहरें कहीं अधिक विनाशकारी हो सकती हैं। सरकार ने लगभग बीस लाख लोगों के लिए निकासी की सलाह जारी की और लोगों से तत्काल तटीय और नदी के किनारों वाले निचले इलाकों को खाली करने का आग्रह किया। सबसे बड़ी चिंता का विषय फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र था, जहां 2011 में भूकंप और सुनामी ने एक भीषण परमाणु आपदा को जन्म दिया था। एहतियात के तौर पर संयंत्र के कर्मचारियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, हालांकि अभी तक किसी भी परमाणु संयंत्र से किसी भी प्रकार की असामान्यता की कोई रिपोर्ट नहीं है।
इस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव केवल रूस और जापान तक ही सीमित नहीं रहा। प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने अमेरिका के हवाई, अलास्का और पश्चिमी तट के साथ-साथ न्यूजीलैंड और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों के लिए भी चेतावनी और सलाह जारी की है। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' पर स्थित देश किस प्रकार निरंतर प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम में रहते हैं। यह भूकंप और उसके बाद उत्पन्न हुई सुनामी की स्थिति विज्ञान, प्रकृति और मानव तैयारियों के बीच निरंतर चलने वाले संघर्ष का एक जीवंत उदाहरण है, जहां उन्नत तकनीक के बावजूद प्रकृति की शक्ति सर्वोपरि है।
