नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी फिर गिरफ्तार, हिरासत से पहले मारपीट के आरोप

नोबेल समिति ने गिरफ्तारी की निंदा कर रिहाई की मांग की

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी फिर गिरफ्तार, हिरासत से पहले मारपीट के आरोप
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी (फोटो)

ईरान की मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को मशहद में एक शोकसभा के दौरान दोबारा गिरफ्तार किया गया। नोबेल समिति ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए उनकी बिना शर्त रिहाई की अपील की है।

तेहरान। ईरान की प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें शुक्रवार को ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में एक शोकसभा के दौरान हिरासत में लिया गया।

शोकसभा के दौरान गिरफ्तारी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नरगिस मोहम्मदी मशहद में दिवंगत मानवाधिकार वकील खुसरो अलीकोर्डी की शोकसभा में शामिल होने पहुंची थीं। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने उन्हें और कई अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। समारोह के वीडियो में मोहम्मदी को बिना हिजाब भीड़ को संबोधित करते और नारे लगवाते हुए देखा गया।

ईरानी प्रशासन का पक्ष

मशहद के गवर्नर हसन हुसैनी ने कहा कि भीड़ के बेकाबू होने और संभावित टकराव की आशंका के चलते यह कार्रवाई की गई। उनके अनुसार, गिरफ्तारियां संबंधित लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई हैं।

नोबेल समिति की कड़ी प्रतिक्रिया

नॉर्वे की नोबेल समिति ने मोहम्मदी की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। समिति ने ईरान सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और बिना शर्त रिहाई की मांग की है।

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हिरासत में मारपीट का आरोप

दिवंगत वकील खुसरो अलीकोर्डी के भाई जावद अलीकोर्डी ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी से पहले नरगिस मोहम्मदी के साथ मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि सभी गिरफ्तार लोगों को रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की खुफिया शाखा से जुड़े हिरासत केंद्र में ले जाया गया है।

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36 साल जेल में, 2023 में मिला नोबेल

53 वर्षीय नरगिस मोहम्मदी अब तक कुल 36 साल जेल में बिता चुकी हैं। उन्हें 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे 2024 से मेडिकल आधार पर अस्थायी रिहाई पर थीं।

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सरकार विरोधी आंदोलनों में सक्रिय भूमिका

मोहम्मदी ईरान सरकार के खिलाफ प्रचार और देश के विरुद्ध मिलीभगत के आरोप में 13 साल 9 महीने की सजा काट रही हैं। उन्होंने 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद हुए देशव्यापी महिला आंदोलनों का खुलकर समर्थन किया था, जिसमें हिजाब विरोध प्रमुख मुद्दा रहा।

Edited By: Mohit Sinha
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Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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