चांदी, सोना या म्यूचुअल फंड? निवेश से पहले जान लें ये 5 जरूरी नियम

चांदी, सोना या म्यूचुअल फंड? निवेश से पहले जान लें ये 5 जरूरी नियम
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नई दिल्ली: शेयर बाजार की रेट थम सी गई है, सोना-चांदी की चमक फीकी पड़ गई है और हर तरफ सब्जियों में हलचल मच गई है। ऐसे डरावने माहौल में एडलवाइस म्यूचुअल फंड की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ राधिका गुप्ता ने सोशल मीडिया X पर एक बेहद व्यावहारिक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने साफ-साफ बताया कि आपके पास ₹30,000 हैं तो इन्हें आंख मूंदकर चांदी या चांदी में न लगाएं। बल्कि, कुछ बुनियादी कदम बढ़ने ही आगे बढ़ें।

निवेशकों का सवालों का दौर: चांदी, सोना या म्यूचुअल फंड?

पिछले कुछ हफ्तों से राधिका गुप्ता को लगातार मैसेज आ रहे हैं। दोस्त पूछते हैं, "चांदी क्यों न खरीद लूं?", रिश्तेदार कहते हैं, "शेयर मार्केट में कुछ लगाऊं?", और आम निवेशक भ्रम में हैं कि म्यूचुअल फंड चुनें या FD से ऊपर उठें। बाजार में वोलैटिलिटी चरम पर है - कभी तेज उछाल, कभी भारी गिरावट। रिटर्न कहीं माइनस में तो कहीं बहुत कम। राधिका ने साफ शब्दों में कहा, "कोई जादुई फॉर्मूला नहीं है। हर निवेश का समय और कांटेक्स्ट अलग होता है।" यह सलाह उन लाखों लोगों के लिए सोने जैसी है जो बाजार के शोर में फंसाकर गलत फैसला लेने को तैयार बैठे हैं।

टिप 1: निवेश से पहले बेसिक्स की ABCD सीख लें

राधिका का पहला और सबसे मजबूत टिप यही है - बिना तैरना सीखे समंदर में न कूदें। मतलब, निवेश शुरू करने से पहले वित्तीय बेसिक्स समझें। म्यूचुअल फंड क्या है, रिस्क कैसे मापें, डायवर्सिफिकेशन का मतलब क्या - ये सब जान लें। बिना ज्ञान के कोई भी एसेट क्लास में पैसे लगाना जोखिम का खेल है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जैसे बिना सांस लेना सीखे गोता लगाना खतरनाक, वैसे ही बिना तैयारी के फंड खरीदना नुकसानदेह। पहले YouTube वीडियो देखें, किताबें पढ़ें या बेसिक कोर्स करें।

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टिप 2: अपना पर्सनल इनवेस्टमेंट स्टेटमेंट लिखें

दूसरा सुझाव बेहद पावरफुल है - एक कागज पर अपना 'निवेश स्टेटमेंट' तैयार करें। इसमें चार मुख्य कॉलम बनाएं: पहला, आपकी इनकम-एक्सपेंस का बैलेंस (कितना बचत में आता है महीने में); दूसरा, मौजूदा इनवेस्टमेंट्स और लोन की पूरी लिस्ट; तीसरा, आपके फाइनेंशियल गोल्स जैसे घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट, साथ में उनकी टाइमलाइन; चौथा, आप कितना रिस्क ले सकते हैं (कम, मीडियम या हाई)। राधिका कहती हैं, "यह लिखित प्लान आपका GPS है। बिना इसके रोड पर भटकते रहेंगे।" इस स्टेटमेंट से साफ हो जाएगा कि ₹30,000 को कहां लगाना सही रहेगा।

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टिप 3: किसी प्रोफेशनल फाइनेंशियल एडवाइजर से मिलें

तीसरा टिप सीधा है - खुद ही सब कुछ न करने की कोशिश करें। किसी विश्वसनीय म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) या सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर से अपॉइंटमेंट लें। अपना स्टेटमेंट लेकर जाएं और 3-4 ऑप्शन्स की तुलना करें। जिससे बात बन जाए, उसी को चुनें। राधिका ने चेताया कि खुदरा निवेशक अक्सर इमोशनल होकर फैसले लेते हैं, लेकिन प्रोफेशनल नजर तटस्थ रखता है। आजकल AMFI रजिस्टर्ड एडवाइजर्स आसानी से मिल जाते हैं - लोकल ब्रांच या ऐप से कनेक्ट करें।

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टिप 4: बाजार के शोर को इग्नोर करें, धैर्य रखें

चौथा टिप बाजार की वोलैटिलिटी से निपटने का है। सोना-चांदी गिर रहा है, शेयर संभाल नहीं रहे - ऐसे में हार्डबड़ी में बिकवाली या खरीदारी न करें। लॉन्ग टर्म गोल्स पर फोकस रखें। राधिका ने सलाह दी कि SIP शुरू करें, लेकिन रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से। अगर रिटर्न म्यूटेड हैं तो घबराएं नहीं, हिस्ट्री गवाह है कि बाजार हमेशा रिकॉवर करता है। ₹30,000 को एकमुश्त न लगाएं, बल्कि इंस्टॉलेशन में बांटें।

टिप 5: डायवर्सिफाई करें और रिव्यू करते रहें

पांचवां टिप है पोर्टफोलियो को फैलाएं - सब कुछ एक जगह न लगाएं। इक्विटी, डेब्ट, गोल्ड ETF या हाइब्रिड फंड्स में बांटें। हर 6 महीने में रिव्यू करें और जरूरत पड़ने पर रीबैलेंस करें। राधिका ने जोर दिया कि FD से ऊब चुके लोग इक्विटी म्यूचुअल फंड्स आजमाएं, लेकिन पहले टिप्स 1-3 फॉलो करें। यह अप्रोच नुकसान से बचाएगी और ग्रोथ देगी।

ये टिप्स क्यों काम करेंगे? राधिका की नजर से

राधिका गुप्ता का यह ओपन लेटर जैसा पोस्ट इसलिए खास है क्योंकि यह हाइप नहीं, रियलिटी पर आधारित है। Edelweiss जैसे बड़े प्लेयर की CEO होने के नाते उनकी सलाह करोड़ों निवेशकों को दिशा दे सकती है। अगर आप भी ₹30,000 या इससे ज्यादा के साथ कन्फ्यूज हैं, तो आज ही इन स्टेप्स से शुरू करें। बाजार का मौजूदा दौर गुजरेगा, लेकिन सही प्लानिंग से आपका पैसा बढ़ेगा।

Edited By: Samridh Desk
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