‘नियति’ शोषण और स्वार्थ की सच्चाई बयान करती कविता
चिता के साथ जलती संवेदनाओं का चित्रण
कविता “नियति” मानव जीवन के उस कटु सत्य को उजागर करती है जिसमें स्वार्थ और शोषण का चक्र निरंतर चलता रहता है। चिता पर जलती लाश के साथ जूँ के जलने का उदाहरण देकर कवि ने यह दिखाया है कि शोषण करने वाला अंततः स्वयं भी उसी नियति का शिकार बनता है।
जलने लगेगी कुछ ही पलों में
चिता पर रखी लाश,
साथ ही
जलना होगा उस जूँ को भी,
जो रहती आई है उसके सिर के बालों में।

क्या ज़िंदा रहकर उसने कोई अपराध किया है?
आदमी मरा है, जूँ तो नहीं,
क्यों जलेगी वो?
शायद बंधी है जूँ शोषण के माया जाल में,
इसीलिए वह भाग नहीं पाती।
किसी ने रोका नहीं है उसे।
जब तक ज़िंदा था वह आदमी,
जूँ ने खूब शोषण किया था उसका,
दिन-रात,
और आज भी शोषणरत है,
जब वह मर चुका है।
स्वार्थ में डूबा हर व्यक्ति
इसी अंजाम को प्राप्त करता है कि
वह किसी को खाता है, तो कोई
उसको खा जाता है।
हर शोषणकर्ता की यही नियति है।
गुड्डू अनिल

Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
