2026 का पहला सूर्यग्रहण: Ring of Fire दिखेगा आसमान में, जानें समय और कहां दिखेगा
वॉशिंगटन: 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्यग्रहण धरती पर दिखाई देगा, जो खास वलयाकार प्रकार का होगा और आसमान में सूरज को 'रिंग ऑफ फायर' यानी आग के छल्ले जैसा बना देगा. यह दुर्लभ खगोलीय घटना तब घटित होती है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपने सबसे दूर वाले बिंदु पर होता है, जिससे वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और सूर्य की बाहरी परत चमकती हुई नजर आती है. दुनिया भर के वैज्ञानिक और ग्रहण प्रेमी इस नजारे को कैद करने की तैयारी में जुटे हैं, हालांकि यह सीमित जगहों पर ही दिखेगा.
ग्रहण का समय और अवधि
नासा के अनुसार, वलयाकार चरण सुबह करीब 7:12 बजे अमेरिकी समय से शुरू होगा और पूर्ण रूप से 1 मिनट 52 सेकंड तक चलेगा, जिसमें चंद्रमा की छाया सूर्य पर पड़ने से रिंग इफेक्ट बनेगा. अंटार्कटिका के कॉर्डिया स्टेशन पर यह ग्रहण स्थानीय समयानुसार शाम 6:48 बजे आंशिक रूप से शुरू होगा, वलयाकार चरण 7:46 बजे आरंभ होकर 2 मिनट 5 सेकंड चलेगा और 8:45 बजे समाप्त होगा. अधिकतम कवरेज 92.46% रहेगा, जो इसकी तीव्रता दर्शाता है.
दिखाई कहां देगा ?

भारत में स्थिति
भारत से इस सूर्यग्रहण को सीधे नहीं देखा जा सकेगा, क्योंकि इसका पथ अंटार्कटिका से गुजर रहा है. हालांकि, ज्योतिषीय दृष्टि से सूतक काल मान्य हो सकता है, जो दोपहर 3:26 बजे से शाम 7:57 बजे तक चलेगा, क्योंकि यह कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा. ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
सूर्यग्रहण कैसे होता है?
सूर्यग्रहण तब पड़ता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जो खगोलीय ज्यामिति का कमाल है. चंद्रमा का आकार सूर्य से 400 गुना छोटा है, लेकिन दूरी भी उतनी ही कम होने से दोनों आकाश में एक समान दिखते हैं. इस संयोग से चंद्रमा सूर्य को ढक लेता है, और वलयाकार मामलों में रिंग बन जाती है.
देखने वाले स्टेशन
अंटार्कटिका में केवल दो रिसर्च स्टेशन इस पूर्ण वलयाकार नजारे के रास्ते पर हैं - कॉर्डिया स्टेशन और अन्य वैज्ञानिक ठिकाने, जहां वैज्ञानिक इस घटना का अध्ययन करेंगे. केसी स्टेशन पर 91.29% तक कवरेज होगा, लेकिन सूर्यास्त के साथ समाप्त.
