Ranchi News: प्राकृतिक खेती की मशाल थामे महिलाएँ, 1875 किसानों तक पहुंचेगा बदलाव का संदेश
प्राकृतिक खेती पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
रांची: दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र, रामकृष्ण मिशन आश्रम में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के अंतर्गत 22 जुलाई से 26 जुलाई 2025 तक "कृषि सखियों के लिए 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम" का सफल आयोजन किया गया.
यह कार्यक्रम जिला उद्यान पदाधिकारी के सहयोग से आयोजित किया गया. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राँची जिले के 8 प्रखंडों से चयनित 30 महिला कृषक सखियों ने भाग लिया. इन सखियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर प्रत्येक 6 किसानों को प्रशिक्षित करना है, जिससे कुल 1875 किसानों तक प्राकृतिक खेती का संदेश एवं प्रशिक्षण पहुँचाया जाएगा. यह प्रशिक्षण 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 125 किसानों के खेतों पर प्रदर्शनों के माध्यम से किया जाएगा.

इसके अतिरिक्त मणिमाला खलखो(टेक्नोलॉजी सुपरवाइजर) एवं सिबू बेदिया ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई. समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए.
कार्यक्रम में राँची जिले के 15 क्लस्टरों को शामिल किया गया, जिनमें प्रत्येक क्लस्टर में 2-2 सीआरपी (Community Resource Person) की नियुक्ति की गई है. क्लस्टरों का विभाजन निम्नानुसार किया गया. चान्हो, मांडर, लापुंग, बड़गाईं में 2 क्लस्टर एवं अगड़ा में 3 क्लस्टर था रातू एवं कांके में 1-1 क्लस्टर नियुक्त किया गया है.
प्रशिक्षण के प्रमुख विषय
प्राकृतिक खेती के निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रतिभागियों को सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया. जिसमें बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत निर्माण, दसपर्णी, ब्रह्मास्त्र, अग्नास्त्र, नीमास्त्र आदि जैविक कीटनाशक, मिश्रित फसल प्रणाली एवं फसल चक्र,वाप्सा तथा मल्चिंग, प्राकृतिक कीट नियंत्रण तकनीक, जैविक खाद, हरी खाद एवं कम्पोस्ट निर्माण, प्राकृतिक खाद प्रबंधन प्रमाणन (Certification) शामिल हैं
स्थानीय नवाचारों की जानकारी
प्रमुख प्रशिक्षक, डॉ. मनोज कुमार सिंह (कोर्स कोऑर्डिनेटर) डॉ. अजीत कुमार सिंह, डॉ. चंद्रशेखर सिंह (एसोसिएट, प्रोफेसर, बीएयू कांके),डॉ. राजेश कुमार, डॉ. नेहा राजन, डॉ. सुदर्शन विश्वास (सहायक प्रोफेसर, RKMVRI) डॉ. रविन्द्र कुमार सिंह,डॉ. विशाखा सिंह, श्री ओ.पी. शर्मा, श्री दीपक पाहन एवं सभी प्रशिक्षकों ने विषय वस्तु को प्रभावी रूप से प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदान किया.
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि सखियों को आत्मनिर्भर बनाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के विस्तार में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने की दिशा में एक सराहनीय पहल सिद्ध हुई.
