बोड़म प्रखंड में महिलाओं के लिए सिलाई प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत
60 महिलाओं को मिला निःशुल्क प्रशिक्षण अवसर
जमशेदपुर के बोड़म प्रखंड स्थित मिर्जाडीह गाँव में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई मशीन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस पहल के तहत 60 ग्रामीण महिलाओं को तीन महीने का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें सिलाई से जुड़ी सभी आवश्यक सामग्रियाँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।
जमशेदपुर : बोड़म प्रखंड अंतर्गत मिर्जाडीह गाँव की सुबह हमेशा की तरह थी—खेतों की पगडंडियों पर चलती महिलाएँ, घर–आंगन में बिखरी ज़िम्मेदारियाँ और मन में दबे हुए कई सपने। किसी ने कभी सोचा नहीं था कि इन्हीं हाथों में एक दिन आत्मनिर्भरता की चाबी भी होगी।
इसी गाँव में संस्कृति सोशल वेलफेयर फाउंडेशन एक सोच लेकर पहुँची—महिलाओं को सहारा नहीं, हुनर चाहिए।

हर महिला को निःशुल्क दी गई—कैंची, दर्जी टेप, कपड़ा, सूता, चौक और सीखने की पूरी सामग्री। तीन महीने का प्रशिक्षण—बिल्कुल निशुल्क, बिना किसी शर्त।
संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद महिलाओं को सिलाई मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि सीखा हुआ हुनर केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि घर बैठे आजीविका का मजबूत साधन बन सके।
किसी की आँखों में झिझक थी, किसी में उम्मीद। किसी ने पहली बार सुई पकड़ी, तो किसी ने पहली बार अपने लिए सपना देखा।
संस्था का विश्वास साफ़ है—जब महिला कमाना सीखती है, तो सिर्फ पैसा नहीं कमाती, आत्मसम्मान कमाती है।
यह प्रशिक्षण सिर्फ कपड़े सिलने का नहीं है; यह महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का प्रशिक्षण है। यह घर की चार दीवारों से निकलकर पहचान बनाने की शुरुआत है।
आज मिर्जाडीह की ये महिलाएँ सिर्फ प्रशिक्षणार्थी नहीं हैं; वे बदलाव की कहानी लिख रही हैं—सूई और धागे से, मेहनत और हौसले से।
और इस कहानी के हर पन्ने पर एक नाम लिखा है—संस्कृति सोशल वेलफेयर फाउंडेशन, जो ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, उन्हें सशक्त कर रही है और उनके सपनों को सच में सिल रही है।
