द्वारका रील हादसा: नाबालिग ड्राइवर की SUV ने युवक को कुचला, पोस्टमॉर्टम में ‘स्पॉट डेथ’ का खुलासा
दिल्ली: द्वारका में हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर लापरवाह ड्राइविंग और सोशल मीडिया के लिए ‘फन रील’ बनाने की खतरनाक प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चलती SUV में रील शूट करते एक नाबालिग ड्राइवर की लापरवाही ने 23 साल के साहिल धनेशरा की मौके पर ही जान ले ली, और अब सामने आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस दुर्घटना की भयावहता को साफ कर दिया है।
हादसा कैसे हुआ?

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला?
साहिल धनेशरा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसकी मौत बेहद दर्दनाक और पल भर में हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, साहिल को गंभीर क्रेनियो-सेरेब्रल ट्रॉमा हुआ, यानी सिर और दिमाग पर इतनी जबरदस्त चोट लगी कि उसी के चलते उसकी मौके पर ही मौत हो गई। डॉक्टरों ने दिमाग और उसकी बाहरी परत के बीच बड़े सबड्यूरल हेमाटोमा की बात कही है, जिसका मतलब है कि आमने-सामने की जोरदार टक्कर के बाद उस जगह पर खून तेजी से जमा हो गया। रिपोर्ट में जनरलाइज्ड ब्रेन ट्रॉमा का भी जिक्र है, जो इस बात का संकेत है कि पूरे दिमाग पर व्यापक असर पड़ा और उसे बचाने का कोई मौका नहीं बचा।
अंदरूनी चोटें और ‘स्पॉट डेथ’
ऑटोप्सी में सिर्फ सिर की ही नहीं, बल्कि शरीर के कई अहम अंगों में भी गंभीर चोटें सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, साहिल की स्प्लीन और लिवर जैसे जरूरी अंगों पर घातक चोटें पाई गईं, जो टक्कर की ताकत और हादसे की तीव्रता को दिखाती हैं। डॉक्टरों ने पाया कि प्ल्यूरल कैविटी, यानी फेफड़ों और छाती की दीवार के बीच की जगह में खून जमा था, जो आमतौर पर छाती पर जोरदार चोट लगने के बाद होता है। कई पसलियों में फ्रैक्चर दर्ज किए गए और खाने की नली व गले में खून मिलने की बात भी रिपोर्ट में लिखी गई, जो अंदरूनी चोटों की गंभीरता को और बढ़ा देती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने मौत का कारण क्रेनियो-सेरेब्रल चोट के चलते हुए हैमरेजिक शॉक और शरीर के कई अंगों को नुकसान बताया, और रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि यह ‘स्पॉट डेथ’ का मामला है, यानी साहिल ने दुर्घटना वाली जगह पर ही दम तोड़ दिया।
मां का दर्द और न्याय की मांग
मृतक साहिल की मां, इना माकन, इस पूरे मामले को ‘क्रिमिनल एक्टिविटी’ बताते हुए आरोपी नाबालिग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही हैं। उनका आरोप है कि सिर्फ सोशल मीडिया पर ‘फन रील’ के लिए इस तरह की लापरवाही की गई और इस गैरजिम्मेदार हरकत ने उनके बेटे की जिंदगी छीन ली। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक रोड एक्सीडेंट नहीं, बल्कि ऐसी मानसिकता का नतीजा है जिसमें प्रभावशाली परिवारों के बच्चे खुद को कानून और नतीजों से ऊपर समझते हैं। इना माकन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ऐसे व्यवहार पर समय रहते रोक नहीं लगी तो सड़कों पर कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
आरोपी नाबालिग, चालान और जांच
पीड़ित पक्ष ने इस बात पर भी सवाल उठाया है कि जिस नाबालिग पर पहले भी स्पीडिंग चालान हो चुका था, उसे दोबारा गाड़ी चलाने की इजाजत कैसे मिली। हादसे के बाद आरोपी नाबालिग को पकड़ा गया और उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया। बोर्ड ने उसकी चल रही बोर्ड परीक्षाओं का हवाला देते हुए उसे अंतरिम जमानत दे दी, जिस पर मृतक परिवार ने नाराजगी जताई है और इसे व्यवस्था की कमजोरी बताया है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और पीड़ित परिवार उम्मीद कर रहा है कि जांच एजेंसियां इसे महज सड़क दुर्घटना के रूप में नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक लापरवाही के केस की तरह देखें।
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