“क्रांति के गीत” युवा चेतना को जगाती प्रेरक कविता
भय छोड़कर अधिकार के लिए खड़े होने का संदेश
“क्रांति के गीत” एक सशक्त कविता है, जो समाज में परिवर्तन, साहस और जागरूकता का संदेश देती है। कवि राजेश पाठक ने युवाओं और आम लोगों को डर छोड़कर अपने अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी है।
करना है कुछ
समय-काल भी तय हो
लिखे क्रांति के गीत
उसीकी जय हो!

प्रेम-सुधा की बातें करकर
जीवन है निष्प्राण
चला जो भी डर-डरकर
दिखे नहीं भयभीत
सभी निर्भय हो
लिखे क्रांति के गीत
उसीकी जय हो!
दिवा स्वप्न जो
देख रहे उनको झकझोरो
लड़ो,अड़ो पर कभी
नहीं अपना हक छोड़ो
इक मौसम का
दूजे संग विलय हो
लिखे क्रांति के गीत
उसीकी जय हो!
हैं एक शब्द के भी
अनेक तो अर्थ यहाँ पर
जो मिले,नहीं तू फेंक,
नहीं कुछ व्यर्थ यहाँ पर
कुछ करो कि सूखी
टहनी पर किसलय हो
लिखे क्रांति के गीत
उसीकी जय हो!
राजेश पाठक (कवि)
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
