राजेश पाठक कविता
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Read More... आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता
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By Mohit Sinha
“आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं। 'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल
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By Mohit Sinha
कवि राजेश पाठक की कविता “जादूगर” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। कविता में प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कानून की कमजोर स्थिति, किसानों और आम जनता की परेशानियों तथा व्यवस्था की निष्क्रियता को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया गया है। कैसी है सरकार? — व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर तीखी सामाजिक कविता
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By Mohit Sinha
राजेश पाठक की कविता “कैसी है सरकार?” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाती है। कविता में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी, महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक अवसरवाद और आम जनता की परेशानियों को मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया गया है। “क्रांति के गीत” युवा चेतना को जगाती प्रेरक कविता
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By Mohit Sinha
“क्रांति के गीत” एक सशक्त कविता है, जो समाज में परिवर्तन, साहस और जागरूकता का संदेश देती है। कवि राजेश पाठक ने युवाओं और आम लोगों को डर छोड़कर अपने अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी है। 