BIT मेसरा में लिडार तकनीक पर मंथन: सटीक मानचित्रण और डेटा विश्लेषण पर विशेषज्ञ व्याख्यान
परिसर और शहरी मॉडलिंग के लिए डिजिटल ट्विन विकास की दी गई जानकारी
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (BIT), मेसरा में 25 मार्च 2026 को "हाइपरस्पेक्ट्रल एवं लिडार डेटा विश्लेषण" कार्यशाला के दूसरे दिन लिडार तकनीक पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. रमिया ए. एम. (IIST तिरुवनंतपुरम) ने लिडार प्रणालियों, मल्टी-रिटर्न सिस्टम और 3D मॉडलिंग के व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे लिडार तकनीक बाढ़ मॉडलिंग, स्मार्ट सिटी विकास और वन विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में सटीक डेटा प्रदान कर राष्ट्रीय नीति निर्माण में सहायक सिद्ध हो रही है।
रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा में “हाइपरस्पेक्ट्रल एवं लिडार डेटा विश्लेषण” विषय पर आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन लिडार तकनीक पर एक विशेषज्ञ सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला रिमोट सेंसिंग एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग द्वारा आयोजित की गई। इस सत्र का संचालन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम के पृथ्वी एवं अंतरिक्ष विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रमिया ए. एम.,द्वारा किया गया।

व्याख्यान के दौरान लिडार तकनीक के विभिन्न अनुप्रयोगों—जैसे बाढ़ मॉडलिंग, डिजिटल ट्विन विकास, शहरी एवं परिसर मॉडलिंग, विद्युत लाइन मानचित्रण तथा वन विश्लेषण (जिसमें व्यक्तिगत वृक्षों की पहचान एवं 3D मॉडलिंग शामिल है)—पर विस्तार से चर्चा की गई। सत्र में ओपन लिडार डेटा सेट, ओपन-सोर्स टूल्स तथा राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीतियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया, जो इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं अनुप्रयोगों के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
चर्चाओं में लिडार तकनीक को वर्तमान राष्ट्रीय आवश्यकताओं—जैसे आपदा प्रबंधन, अवसंरचना योजना, स्मार्ट सिटी विकास एवं पर्यावरण निगरानी—के संदर्भ में भी प्रस्तुत किया गया, जहाँ उच्च-सटीकता वाले स्थानिक डेटा की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है और यह नीति निर्माण एवं निर्णय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
