शिक्षा को सशक्त बनाना: रश्मि बिरहोर ने राष्ट्रपति से की मुलाकात, शिक्षा के महत्व पर चर्चा
पीवीटीजी समुदाय की पहली ग्रेजुएट छात्रा ने साझा की अपनी कहानी
रश्मि के साथ टाटा स्टील फाउंडेशन (टीएसएफ), वेस्ट बोकारो के सामुदायिक विकास सहायक प्रबंधक दीपक कुमार श्रीवास्तव भी थे. रश्मि की यात्रा टीएसएफ की आकांक्षा परियोजना के माध्यम से संभव हुए परिवर्तन का एक ज्वलंत उदाहरण है, जो गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक अवसर प्रदान करके पीवीटीजी बच्चों की शिक्षा का समर्थन करती है.
रांची/जमशेदपुर/रामगढ़: झारखंड के विशेष रूप से वंचित जनजातीय समूह (पीवीटीजी) समुदाय की एक मेधावी छात्रा रश्मि बिरहोर ने गुरुवार को रांची स्थित राजभवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से एक गौरवपूर्ण और महत्वपूर्ण मुलाकात की.
रश्मि के साथ टाटा स्टील फाउंडेशन (टीएसएफ), वेस्ट बोकारो के सामुदायिक विकास सहायक प्रबंधक दीपक कुमार श्रीवास्तव भी थे. रश्मि की यात्रा टीएसएफ की आकांक्षा परियोजना के माध्यम से संभव हुए परिवर्तन का एक ज्वलंत उदाहरण है, जो गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक अवसर प्रदान करके पीवीटीजी बच्चों की शिक्षा का समर्थन करती है.


2016 में, तत्कालीन झारखंड की राज्यपाल मुर्मू ने रामगढ़ जिले के बसंतपुर पंचायत के बिरहोर टोला का दौरा किया, जहाँ उन्होंने लुप्तप्राय आदिम जनजाति की एक बिरहोर बालिका रश्मि को अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया. आकांक्षा परियोजना का उद्देश्य पीवीटीजी समुदायों के छात्रों के लिए शिक्षा तक पहुँच बढ़ाकर व्यवस्थागत बाधाओं को दूर करना है. वित्तीय वर्ष 2013 में शुरू की गई यह पहल, वित्तीय सहायता, आवासीय शिक्षा और शैक्षणिक सहायता प्रदान करके पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों को सशक्त बनाने में मदद करती है. यह शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार, सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने और छात्रों को सामुदायिक परिवर्तनकर्ता बनने में सक्षम बनाने पर केंद्रित है.
रश्मि 2017 में आकांक्षा परियोजना में शामिल हुईं और उन्होंने सेंट रॉबर्ट्स गर्ल्स स्कूल, हजारीबाग से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. बाद में उन्होंने जीएम इवनिंग कॉलेज, हजारीबाग से स्नातक की उपाधि प्राप्त की—इस प्रकार वे रामगढ़ जिले में पीवीटीजी समुदाय से पहली मैट्रिक और स्नातकोत्तर उत्तीर्ण बनीं.
उनकी उपलब्धि आकांक्षा परियोजना के दीर्घकालिक प्रभाव का प्रमाण है और हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान में समावेशी शिक्षा की शक्ति को दर्शाती है. आज माननीय राष्ट्रपति के साथ रश्मि की बातचीत न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का जश्न मनाती है, बल्कि पीवीटीजी युवाओं की बढ़ती आकांक्षाओं को भी उजागर करती है.
रश्मि के परिवार में उनके पिता सुधांशु बिरहोर, उनकी माता सावा देवी और उनका छोटा भाई मनीष कुमार शामिल हैं, जो वर्तमान में कक्षा दो में पढ़ रहे हैं. उनकी कहानी आदिवासी क्षेत्रों के सैकड़ों बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें बड़े सपने देखने और दृढ़ संकल्प के साथ शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करती है.
आकांक्षा परियोजना के बारे में:
टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा कार्यान्वित, आकांक्षा परियोजना, पीवीटीजी छात्रों को आवासीय और गैर-आवासीय स्कूली शिक्षा, वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करके उनका समर्थन करती है. इसने 80 से अधिक बिरहोर छात्रों को झारखंड के प्रमुख संस्थानों में अपनी शिक्षा जारी रखने में सक्षम बनाया है.
Senior Technical Editor | Writer | Asst. Editor, Political, Geopolitical & Social Affairs
Working across digital media, technology, public discourse, and contemporary political developments.
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