संघर्ष की उड़ान: डिलीवरी बॉय से अफसर बने राजेश रजक, झारखंड प्रशासनिक सेवा में रच डाली नई कहानी
पिता की मृत्यु के बाद पढ़ाई छोड़ने की नौबत आने पर नहीं मानी हार
राजेश ने JSSC-CGL परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की थी, हालांकि वह मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है.
हजारीबाग: झारखंड प्रशासनिक सेवा परीक्षा में इस बार कई ऐसे उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है, जिनका जीवन अभावों और संघर्षों से भरा रहा. उन्हीं में से एक हैं हजारीबाग जिले के बरकट्ठा प्रखंड के सुदूरवर्ती केंदुआ गांव निवासी राजेश रजक, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और झारखंड जेल सेवा में चयनित होकर 271वीं रैंक हासिल की है. उनकी कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
राजेश एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता किसान थे, जिनका निधन वर्ष 2017 में उस समय हो गया था, जब राजेश 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे. पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पर यह एक बड़ा आघात था. पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी राजेश और उनके बड़े भाई पर आ गई. उनका भाई मुंबई में मजदूरी करता है और मां पास के ही एक सरकारी स्कूल में रसोईया हैं.
राजेश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की और फिर हजारीबाग से 12वीं तथा स्नातक की पढ़ाई की. पिता की मृत्यु के बाद जब पढ़ाई छोड़ने की नौबत आ गई, उसी समय उन्हें एक निजी स्कूल में ₹6000 प्रति माह की नौकरी मिल गई. इस आमदनी से उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि घर भी संभाला.

आज जब उनका चयन प्रशासनिक सेवा में हुआ है, तो गांव से लेकर शहर तक लोग उनकी सफलता की मिसाल दे रहे हैं. उनकी मां जानकी देवी के लिए यह पल भावुक कर देने वाला है. उनकी आंखों से बहते आंसू उस खुशी को बयां कर रहे हैं, जिसे शब्दों में बयान करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है.
राजेश का कहना है, "मेरे जैसे साधारण परिवार से आने वाले युवाओं को कभी हार नहीं माननी चाहिए. परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर मेहनत और धैर्य के साथ निरंतर प्रयास किया जाए, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं रहती."
उनकी यह सफलता न सिर्फ उनके व्यक्तिगत संघर्ष की जीत है, बल्कि यह हजारों युवाओं के लिए यह संदेश है कि संसाधन की कमी कभी सपनों की उड़ान नहीं रोक सकती — जरूरत है तो बस दृढ़ निश्चय और लगातार मेहनत की.
