Bokaro News: जनरल अस्पताल में चमत्कार: मौत के मुँह से वापस लौटा 31 वर्षीय बीएसएल कर्मचारी
कैजुअल्टी, एनेस्थीसिया और नर्सिंग स्टाफ के सामूहिक प्रयास से बची जान
बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) के डॉक्टरों ने एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हुए 31 वर्षीय बीएसएल कर्मचारी को मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया है। न्यूरोसर्जन डॉ. आनंद कुमार के नेतृत्व में आधी रात को की गई जटिल सर्जरी और 50 दिनों के गहन उपचार के बाद मरीज पूरी तरह स्थिर होकर घर लौट गया है। यह मामला बीजीएच की उन्नत ट्रॉमा केयर और त्वरित चिकित्सा प्रतिक्रिया का एक बेहतरीन उदाहरण है।
बोकारो: जनरल अस्पताल में समय के साथ चली एक कड़ी जंग में, अजीत मिश्रा (गोपनीयता के लिए बदला हुआ नाम), जो कि 31 वर्षीय बीएसएल कर्मचारी हैं, को मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया गया। धनबाद के पास हुई एक भीषण बाइक दुर्घटना के बाद उन्हें बोकारो जेनरल अस्पताल लाया गया था, जहाँ उनके सिर में भारी आंतरिक रक्त स्राव सिर और चेहरे की कई हड्डियाँ टूटना और पैर में फ्रैक्चर जैसी गंभीर चोटें थीं। देर रात को अस्पताल पहुँचने के कुछ ही देर में मरीज कोमा में चले गए और उनकी स्थिति हर बीतते पल के साथ बिगड़ती जा रही थी।
न्यूरोसर्जन डॉ.आनंद कुमार ने आंतरिक रक्तस्राव को रोकने के लिए सुबह 3 बजे एक जटिल सर्जरी शुरू की, जो 3 घंटे से अधिक समय तक चली। डॉ.आनंद के अनुसार, यदि इलाज में 30 से 60 मिनट की भी देरी होती, तो यह जानलेवा साबित हो सकता था। सामान्यत ऐसे मामलों में मृत्यु दर 60 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच होती है। गोल्डन आवर" के दौरान मिली इस सफलता में कैजुअल्टी मेडिकल अफसर डॉ.सुनील कुमार, डॉ.सौरभ खडतकर (डी.एन.बी.जनरल सर्जरी) और डॉ. प्रेमनीत कुमार (मेडिकल अफसर, न्यूरोसर्जरी) की त्वरित प्रतिक्रिया और सहयोग की अहम भूमिका रही। सर्जरी के बाद मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था, जहाँ उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी। ऑपरेशन के दो दिन बाद मरीज ने पहली बार अपनी आँखें खोलीं।

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