सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: NHAI को वित्तीय बोझ बहाना नहीं चलेगा, मुआवजा देना होगा
कोर्ट ने क्या कहा?, NHAI का दावा और कोर्ट का जवाब, किसानों को मिलेगी राहत?
By: Samridh Desk
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मामलों में मुआवजे को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट ने साफ कहा कि वित्तीय बोझ का हवाला देकर किसानों या भूमि मालिकों को उचित मुआवजा, सोलाटियम और ब्याज देने से इनकार नहीं किया जा सकता। यह फैसला 4 फरवरी 2025 के कोर्ट के उस आदेश की समीक्षा याचिका पर आया, जिसमें NHAI ने करीब 29,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बोझ का रोना रोया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच ने NHAI के तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के तहत उचित मुआवजा देना समय की मांग है। बेंच ने स्पष्ट किया कि भले ही संशोधित वित्तीय आंकड़े रिकॉर्ड पर लाए जाएं, लेकिन वे पहले के फैसले के गुण-दोष पर पुनर्विचार का आधार नहीं बन सकते। यह मामला यूनियन ऑफ इंडिया बनाम तरसेम सिंह (2019) से जुड़ा है, जहां कोर्ट ने NHAI एक्ट के तहत अधिग्रहीत जमीन पर भी सामान्य भूमि अधिग्रहण कानून के लाभ (सोलाटियम और 9% ब्याज) लागू करने का आदेश दिया था।
NHAI ने दावा किया था कि 1995 से अब तक की अधिग्रहणों पर यह फैसला लागू होने से 29,000 करोड़ का बोझ पड़ेगा, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वित्तीय भार का आकार मुआवजे को कम करने का बहाना नहीं बन सकता। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 2008 के गोल्डन आयरन एंड स्टील फोर्जिंग मामले ने भी इस दिशा में मिसाल कायम की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। कोर्ट ने यह भी सीमित किया कि 2018 से पहले के कुछ मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा, लेकिन मौजूदा हक को कमजोर नहीं किया।
इस फैसले से देशभर के राजमार्ग परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण प्रभावितों को राहत मिलेगी, खासकर उन किसानों को जो बिना उचित मुआवजे के अपनी जमीन गंवा चुके थे। NHAI को अब इन दावों को निपटाने होंगे, जो इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देरी को जन्म दे सकते हैं। लेकिन कोर्ट का रुख साफ है- किसानों का हक संविधान की गारंटी है, जिसे सरकारी खजाने की तंगी से जोड़ा नहीं जा सकता।
Edited By: Samridh Desk
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