भारत-रूस रक्षा सौदा: अमेरिका की चेतावनी के बीच डोभाल का मॉस्को दौरा, S-400 और Su-57 पर अहम बातचीत
रक्षा सौदों के साथ-साथ आत्मनिर्भरता पर भी जोर
नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल रूस के दौरे पर हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका द्वारा रूस के साथ भारत के तेल और रक्षा सौदों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी जा रही है।
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की अहम भूमिका
एनएसए (NSA) डोभाल का रूस दौरा एक ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में चलाए गए सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की सैन्य ताकत को पूरी दुनिया के सामने साबित किया है। इस ऑपरेशन के दौरान, पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए।

रक्षा सौदों पर अहम बातचीत:
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S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम: रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोभाल की यात्रा में भारत द्वारा अतिरिक्त S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। यह प्रणाली भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे पाकिस्तान के खिलाफ "ऑपरेशन सिंदूर" जैसे सैन्य अभियानों में प्रभावी साबित माना गया है।
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Su-57 फाइटर जेट: भारत पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमानों की खरीद पर भी विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि यह विमान अमेरिका के F-35 फाइटर जेट का एक प्रभावी विकल्प हो सकता है, जिसकी खरीद में भारत को तकनीकी सीमाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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रक्षा उपकरणों का रखरखाव (MRO): बातचीत में S-400 मिसाइल सिस्टम के लिए भारत में ही रखरखाव (MRO) की सुविधा स्थापित करने की योजना भी शामिल है।
अमेरिका की धमकियां और भारत का रुख:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने और सैन्य सौदे करने पर भारत पर 25% और फिर अतिरिक्त 25% तक टैरिफ लगाया है। इसके बावजूद, भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है और रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
पुतिन से मुलाकात की संभावना: डोभाल की इस यात्रा में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात हो सकती है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों की अहमियत का पता चलता है। यह यात्रा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
