बिटिया रानी: शहीद पिता की याद में भावुक कविता
बेटी के सवाल और पिता की याद
“बिटिया रानी” कविता एक शहीद सैनिक की बेटी की भावनाओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। कविता में बेटी अपने पिता को याद करते हुए सवाल करती है और उनके बिना जीवन की कठिनाइयों को व्यक्त करती है।
उठो पापा, जागो पापा,
बोलो ना पापा आँखें खोलो ना पापा
रो रो कहे बिटिया रानी
यह कैसी लिखी मेरी कहानी

मां भारती कि बाहों में
हमें गर्व है पापा,
विरले ही जाते इन राहों में
पर यह बताओ पापा,
दिल को कैसे समझाऊँगी
आपकी प्यारी बिटिया रानी,
कैसे मैं कहलाउँगी
कहे बिटिया रानी,
यह कैसी लिखी मेरी कहानी
छुट्टी में जब आते तुम
महंगे कपड़े लाते थे
छोटू को बाहों में लेकर
घंटो तुम झुलाते थे
नहीं चाहीए महंगे कपड़े
गुडियों का सामान
हमें चाहीए पापा
आपकी छोटी-सी मुस्कान
कहे बिटिया रानी,
यह कैसी लिखी मेरी कहानी
पैसे देने लोग खड़े हैं
लम्बी कतारों में
अब सियासत होंगी
यहाँ मुर्दों के बाजारों में
पर यह बतादो पापा
अब आगे कैसे मैं जाउँगी
नरभक्षी संसार में,
अब मैं कैसे कदम बढ़ाउँगी
कहे बिटिया रानी,
यह कैसी लिखी मेरी कहानी
कवि : गुड्डू अनिल, रांची (झारखंड)
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
