Koderma News: हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ईद-उल-फितर, सद्भाव और भाईचारे का संदेश
"ईदगाह से निकलने से पहले एक-दूसरे को माफ करें": मौलाना शहादत हुसैन
कोडरमा जिले में शनिवार को ईद-उल-फितर का त्योहार बड़े ही उत्साह और शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। जिला मुख्यालय स्थित जलवाबाद ईदगाह समेत विभिन्न मस्जिदों में हजारों लोगों ने सामूहिक नमाज अदा कर मुल्क की तरक्की और अमन-चैन की दुआ मांगी। इस अवसर पर मौलाना शहादत हुसैन ने समुदाय को शिक्षा (तालिमी बेदारी) और अच्छे संस्कारों के प्रति जागरूक किया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और घरों में मीठी सेंवइयों का लुत्फ उठाया।
कोडरमा: ज़िले के विभिन्न क्षेत्रों में शनिवार को हर्षोल्लास व उत्साह के साथ ईद उल फितर का त्योहार मनाया गया। इस दौरान बच्चे, बड़े और बुजुर्ग नए एवं साफ कपड़े पहन, खुश्बू, सुरमा लगा कर ईदगाह और मस्जिद में जाकर ईद की नमाज अदा किए। ज़िला मुख्यालय स्थित जलवाबाद ईदगाह में मौलाना शहादत हुसैन, असनाबाद मस्जिद में हाफिज सरफराज आलम, बेलाल मस्जिद में हाफिज सफीक, भादोडीह में हाफ़िज़ मंजर आदि ने ईद की नमाज़ सामुहिक रूप से अदा कराई। इस दौरान जलवाबाद ईदगाह में मौलाना शाहदत हुसैन ने कहा ईद के नमाज से पहले सभी लोग एक दूसरे को माफ कर ईदगाह से निकलें। क्योंकि इस्लाम मोहब्बत और अच्छे एखलाक का पैगाम देता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देने की बात कही, ताकि वह अपने गांव मुहल्ले का ही नहीं बल्कि देश का नाम रौशन कर सके।

मौलाना शहादत ने सामूहिक रूप से ईद की नमाज़ पढ़ाई औऱ मुल्क में अमन शांति, भाईचारे के साथ देश की उन्नति, प्रगति की दुआ माँगी। तत्पश्चात लोगों ने एक दूसरे से गले मिल कर ईद की मुबारकबाद दी और ईदगाह से निकल कर लोग एक दूसरे के घरों में जाकर मीठी संवैया खाई और ईद की मुबारकबाद दिए। ईद उल फितर के मौके पर जलवाबाद ईदगाह में कारी खैरुलवारा, हाफिज मोख्तार, आईएएस मो जावेद, हाजी आफ़ताब, फैज वारसी, हाजी प्रवेज़, मो कासिम उद्दीन, मो तबरेज़, मौलाना महबूब, बेलाल मस्जिद में हाजी साजिद हुसैन, हाजी हक़ीम, मनान खान, हाजी फारूक, राजू खान, हुदा खान, दर्जिचक में मो बदरुद्दीन, मो जावेद, महताब आदि, असनाबाद में हाजी गुलाम जिलानी, अधिवक्ता अनवर हुसैन, अधिवक्ता रिजवान अहमद, मो चांद, अजीम आदि सहित हजारों की संख्या में मुस्लिम धर्म के लोग नमाज में शामिल हुए।
