Opinion: भारत को शेर बनाने की संघ की कवायद ऑपरेशन सिंदूर से लेकर चुनावी रणभूमि तक
मोहन भागवत ने कोच्चि से दिया भारत को शेर बनाने का ऐलान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कोच्चि से भारत को 'शेर' बनाने का आह्वान कर साफ कर दिया है कि अब राष्ट्रवाद और ताकत की भाषा ही प्राथमिक एजेंडा होगी। संसद में जब ऑपरेशन सिंदूर पर बहस चल रही थी, उसी समय भागवत ने मैकाले की शिक्षा नीति, 'भारत बनाम इंडिया' विवाद और कट्टर हिंदुत्व की परिभाषा को नए सिरे से रखा
भारत को फिर से सोने की चिड़िया नहीं, बल्कि शेर बनाना है यह संदेश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने केरल की धरती से दिया है। जिस वक्त संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस चल रही थी, उसी वक्त कोच्चि में भागवत ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ज्ञान सभा में मंच से जो कहा, उसका मतलब सिर्फ शिक्षा तक सिमटा नहीं रह गया। असल में यह आने वाले विधानसभा चुनावों से लेकर पाकिस्तान को चेतावनी तक, हर जगह एक नई लय जोड़ता नजर आता है। संघ प्रमुख ने साफ कर दिया कि अब भारत को ताकतवर बनना होगा क्योंकि दुनिया सिर्फ शक्ति की भाषा समझती है। यह बात ऐसे दौर में कही गई है जब ऑपरेशन सिंदूर के जरिए देश ने फिर से दिखा दिया है कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने में अब कोई समझौता नहीं होगा। पहलगाम में हमलावरों को जिस तरह सुरक्षा बलों ने घेरकर मार गिराया, उससे सरकार का आत्मविश्वास संसद में भी झलका। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि देश के बड़े लक्ष्य पर ध्यान रखें, छोटे मुद्दों में उलझकर सैनिकों के सम्मान और सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
मोहन भागवत ने इस मौके पर मैकाले की शिक्षा नीति का जिक्र कर यह भी समझा दिया कि भारत को अपनी परंपरा और संस्कृति से कटकर कभी ताकतवर नहीं बना जा सकता। उनका कहना था कि हमें शिक्षा को सिर्फ रोजगार से नहीं जोड़ना चाहिए बल्कि यह समाज निर्माण और सेवा भाव को मजबूत करने वाली होनी चाहिए। संघ हमेशा से ही शिक्षा में भारतीय मूल्यों के समावेश पर जोर देता रहा है। लेकिन इस बार बात महज शिक्षा सुधार तक नहीं रुकी, भागवत ने साफ कर दिया कि भारत की पहचान भारत ही रहनी चाहिए। उन्होंने भारत बनाम इंडिया की बहस में दखल देते हुए कहा कि इंडिया दैट इज भारत ठीक है, लेकिन भारत का अनुवाद नहीं होना चाहिए। ये बात विपक्ष के उस इंडिया गठबंधन के लिए भी सीधा संदेश है जिसने नामकरण को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। भागवत ने कहा कि जब हम लिखते-बोलते हैं तो भारत को भारत ही कहना चाहिए, यही असली सम्मान है।

केरल में यह बात कहना भी अपने आप में बड़ा संदेश है क्योंकि दक्षिण भारत में बीजेपी को अब भी बाहरी पार्टी माना जाता है। लेकिन संघ पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण में लगातार सक्रिय है। केरल में खासकर ईसाई और मुस्लिम वोट बैंक को साधना आसान नहीं है, लेकिन शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे ऐसे हैं जिनके जरिए जमीन पर धीरे-धीरे पकड़ बनाई जा सकती है। यही वजह है कि कोच्चि से लेकर कोयंबटूर तक संघ के कई संगठनों ने शिक्षा सम्मेलन से लेकर स्वास्थ्य शिविर तक का सहारा लिया है ताकि जमीनी जुड़ाव बने।मोहन भागवत के ताजा बयानों से बीजेपी को यह भी मदद मिलेगी कि जब नेता चुनावी मंचों से 'हाउ इज द जोश?' पूछेंगे तो ऑपरेशन सिंदूर और शेर वाला नैरेटिव वोटरों के मन में ताजा रहेगा। पहलगाम का एनकाउंटर, संसद की गरमा-गरम बहस और संघ प्रमुख का शेर वाला संदेश ये तीनों मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव आते-आते विपक्ष के जातीय समीकरण या बेरोजगारी जैसे सवाल राष्ट्रवाद के शोर में दब जाएं।
बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट तो खैर संघ के बिना चलता ही नहीं। लेकिन हर बार संघ सड़कों पर दिखकर नहीं बल्कि चुपचाप गांव-कस्बों में मतदाता सूची खंगालने, बूथ लेवल कैडर मजबूत करने और संदेश पहुंचाने में लगा रहता है। ऊपर से भागवत जैसे बयान उस कैडर को दिशा देते हैं। जमीन पर कार्यकर्ता जब लोगों को समझाता है कि भारत अब शेर बन गया है और अब कोई भी दुश्मन सीमा पार से हमला नहीं कर पाएगा तो वोटर को भरोसा होता है कि मजबूत सरकार जरूरी है।ऐसे में आने वाला साल बीजेपी के लिए बड़ा है। बिहार चुनाव की तैयारी, बंगाल में पकड़ मजबूत करना और तमिलनाडु में नई जमीन तलाशना इन तीनों के बीच ऑपरेशन सिंदूर की गूंज और मोहन भागवत की शेर वाली लाइन जैसे तुरुप के पत्ते हैं। यही कारण है कि संसद से लेकर पंचायत तक बीजेपी की स्क्रिप्ट तैयार है भारत अब बुद्ध का देश तो रहेगा, लेकिन कमजोर नहीं रहेगा। यही लाइन विपक्ष के जातीय गठजोड़ों पर भारी पड़ सकती है।
कुल मिलाकर मोहन भागवत का केरल दौरा, संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा और पहलगाम में आतंकियों के खात्मे की खबर तीनों बातें एक ही कड़ी में बंध जाती हैं। भारत अब सोने की चिड़िया नहीं, शेर बनेगा और इस शेर की दहाड़ चुनावी मैदान तक पहुंचाई जाएगी। यही संघ की रणनीति है, यही बीजेपी का प्रचार मंत्र बनने वाला है। यही वजह है कि कोच्चि से उठी आवाज दिल्ली से लेकर दरभंगा तक गूंजेगी भारत अब किसी के दबाव में झुकने वाला नहीं है। यही बात जनता को याद दिलाई जाएगी और यही बात 2025-26 के चुनावी नतीजों में कितनी असर डालेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
संजय सक्सेना,लखनऊ
वरिष्ठ पत्रकार
