बीआईटी मेसरा में झारखंड की जनजातीय विरासत और डिजिटल नवाचार पर राष्ट्रीय कार्यशाला

तीन दिवसीय कार्यशाला में विद्वान, नीति-निर्माता और उद्यमी होंगे शामिल

बीआईटी मेसरा में झारखंड की जनजातीय विरासत और डिजिटल नवाचार पर राष्ट्रीय कार्यशाला
बीआईटी मेसरा (फाइल फोटो)

बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा में झारखंड की जनजातीय विरासत, डिजिटल नवाचार और सतत उद्यमिता पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित होने जा रही है। “रूट्स टू रेनैसां” शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्वान, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और उद्यमी भाग लेंगे।

रांची : बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा (बीआईटी मेसरा) अपने मेसरा परिसर में कला, संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सतत उद्यमिता पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करने जा रहा है। “रूट्स टू रेनैसां: झारखंड की जनजातीय विरासत, नवाचार और डिजिटल उद्यमिता का समन्वय” शीर्षक से आयोजित यह कार्यक्रम प्रबंधन अध्ययन विभाग और मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को झारखंड सरकार पर्यटन, कला एवं संस्कृति निदेशालय का सहयोग प्राप्त है।

तीन दिवसीय इस कार्यशाला में झारखंड की जनजातीय विरासत और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें विभिन्न विद्वान, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और उद्यमी भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान यह चर्चा की जाएगी कि मौखिक कहानी कहने की परंपरा और हस्तशिल्प जैसी पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहरों को डिजिटल माध्यमों की सहायता से किस प्रकार दर्ज कर डिजिटल रूप में सुरक्षित और संरक्षित किया जा सकता है।

इस अवसर पर संस्थान के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना उपस्थित रहेंगे। झारखंड सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक आसिफ इकरम मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में प्रबंधन अध्ययन विभाग के अध्यक्ष संजय कुमार झा भी अपना संबोधन देंगे।

कार्यक्रम में झारखंड की जनजातीय विरासत पर केंद्रित सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी आयोजित किए जाएंगे। सत्रों में यह बताया जाएगा कि डिजिटल उपकरणों की मदद से लोककथाओं, बोलियों और पारंपरिक संगीत का दस्तावेजीकरण कैसे किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने की कला का प्रदर्शन, मोटे अनाज आधारित पारंपरिक खाद्य प्रणालियों पर चर्चा तथा मौखिक इतिहास को सुरक्षित रखने पर कार्यशालाएँ भी आयोजित होंगी।

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इसके साथ ही उद्यमिता प्रयोगशाला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ जैसे छऊ नृत्य और पैका नृत्य, तथा विद्यार्थियों की प्रस्तुतियाँ भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी।

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यह कार्यशाला झारखंड में सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत से जुड़े उद्यमों पर कार्य कर रहे शोधकर्ताओं, कारीगरों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की अपेक्षा रखती है।

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Edited By: Mohit Sinha
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Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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