गणतंत्र के मंच पर सत्ता का अहंकार: भाजपा ने लोकतंत्र को शर्मसार किया
लेखक विजय शंकर नायक ने भाजपा सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
कांग्रेस वरिष्ठ नेता विजय शंकर नायक ने अपने लेख में 77वें गणतंत्र दिवस पर हुए सीट विवाद को लोकतंत्र और संविधान के सम्मान के खिलाफ बताते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की है।
रांची : गणतंत्र दिवस भारत के संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता का उत्सव है। यह किसी एक दल, सरकार या विचारधारा का नहीं, बल्कि देश की जनता और उसकी संप्रभुता का प्रतीक है। लेकिन 77वें गणतंत्र दिवस पर जो कुछ देखने को मिला, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा के लिए अब राष्ट्रीय उत्सव भी राजनीतिक वर्चस्व दिखाने का माध्यम बनते जा रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जनता की प्रतिक्रिया अभूतपूर्व रही। हजारों नागरिकों ने इसे “Shame Alert” कहा। कई लोगों ने भाजपा सरकार को “डरपोक” और “असहिष्णु” बताया। कांग्रेस सांसद मनिक्कम टैगोर का यह कथन कि यह “सरकार की मानसिकता” को उजागर करता है, आज देश की बड़ी आबादी की भावना बन चुका है।
सवाल यह है कि भाजपा को विपक्ष से इतना डर क्यों है?
क्या कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मौजूदगी भाजपा को अपनी वैचारिक कमजोरी का एहसास कराती है?
दुर्भाग्यपूर्ण यह भी रहा कि जब सरकार असहज हुई, तो उसने असली मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी के गमोसा न पहनने जैसे निरर्थक और बचकाने आरोप उछाल दिए। यह भाजपा की पुरानी रणनीति है—जब सवाल कठोर हों, तो प्रतीकों, कपड़ों और भावनात्मक मुद्दों की आड़ ले ली जाए। कांग्रेस द्वारा इस आरोप को खारिज करना पूरी तरह उचित था।
यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कमजोर किया हो—
• संसद में विपक्ष की आवाज़ दबाना
• बिना चर्चा के कानून थोपना
• जांच एजेंसियों का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल
• राज्यपालों के ज़रिये निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करना
ये सभी उदाहरण भाजपा की उसी सोच को दर्शाते हैं, जहाँ लोकतंत्र को सहमति नहीं, बल्कि नियंत्रण से चलाया जाना चाहिए। भाजपा लगातार राष्ट्रवाद की बात करती है, लेकिन राष्ट्रवाद का अर्थ विपक्ष का अपमान नहीं होता। संविधान का सम्मान केवल मंच से भाषण देने से नहीं, बल्कि व्यवहार से साबित होता है। जब राष्ट्रीय उत्सवों को राजनीतिक स्कोर सेटलिंग का अखाड़ा बनाया जाता है, तब असल में संविधान और लोकतंत्र—दोनों का अपमान होता है। गणतंत्र का सच्चा सम्मान तभी होगा जब सत्ता अहंकार छोड़कर संवाद को अपनाए। लेकिन फिलहाल भाजपा सरकार का रवैया यह दिखाता है कि वह लोकतंत्र नहीं, बल्कि एकाधिकार चाहती है—जहाँ असहमति असुविधा है और विपक्ष बोझ।
यदि भाजपा इसी रास्ते पर चलती रही, तो गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र अवसर भी सत्ता के प्रचार उत्सव बनकर रह जाएंगे। यह देश और लोकतंत्र—दोनों के लिए खतरनाक संकेत है। कांग्रेस का विरोध पूरी तरह जायज़ है। यह लड़ाई किसी सीट की नहीं, बल्कि संविधान, सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है। अब देश जवाब चाहता है—क्या भाजपा लोकतंत्र के साथ खड़ी है, या सिर्फ सत्ता के साथ?
Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.
