Indian democracy
आर्टिकल  राजनीति 

आपातकाल: भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय, इंदिरा गांधी की वह क्रूरता जिसे देश कभी नहीं भूल सकता

आपातकाल: भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय, इंदिरा गांधी की वह क्रूरता जिसे देश कभी नहीं भूल सकता 25 जून 1975 को लागू आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए इस लेख में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसले, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी, प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और 42वें संविधान संशोधन जैसे घटनाक्रमों का उल्लेख किया गया है।
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समाचार  राज्य  रांची  झारखण्ड 

गणतंत्र के मंच पर सत्ता का अहंकार: भाजपा ने लोकतंत्र को शर्मसार किया

गणतंत्र के मंच पर सत्ता का अहंकार: भाजपा ने लोकतंत्र को शर्मसार किया कांग्रेस वरिष्ठ नेता विजय शंकर नायक ने अपने लेख में 77वें गणतंत्र दिवस पर हुए सीट विवाद को लोकतंत्र और संविधान के सम्मान के खिलाफ बताते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की है।
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ओपिनियन 

Opinion : संसद सत्र के बाद चाय की तस्वीरों से बदली कांग्रेस की सियासत, प्रियंका गांधी का बढ़ता राजनीतिक कद

Opinion : संसद सत्र के बाद चाय की तस्वीरों से बदली कांग्रेस की सियासत, प्रियंका गांधी का बढ़ता राजनीतिक कद संसद के शीतकालीन सत्र के बाद चाय पर हुई मुलाकात की तस्वीरों ने कांग्रेस की राजनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। प्रियंका गांधी की सक्रियता और संवाद शैली चर्चा में है।
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राजनीति  राष्ट्रीय 

कल राष्ट्रपति भवन में सीपी राधाकृष्णन लेंगे उपराष्ट्रपति पद की शपथ

कल राष्ट्रपति भवन में सीपी राधाकृष्णन लेंगे उपराष्ट्रपति पद की शपथ नई दिल्ली: भारत को नया उपराष्ट्रपति मिला है। सीपी राधाकृष्णन ने 67 वर्ष की उम्र में उपराष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 12 सितंबर 2025 को सुबह 10 बजे राष्ट्रपति भवन...
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ओपिनियन 

Opinion: पड़ोसी देशों की अराजकता में भारतीय संविधान की ताकत का संदेश

Opinion: पड़ोसी देशों की अराजकता में भारतीय संविधान की ताकत का संदेश भारत का संविधान सिर्फ किताब का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि 75 वर्षों से लोकतंत्र का मार्गदर्शक है। यही भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि है जिसने उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में खड़ा किया है।
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