745 साल बाद मिला मंगोल जहाज, जानिए क्यों फेल हो गया था दुनिया का सबसे बड़ा हमला
एक तूफान ने कैसे बदल दी थी इतिहास की दिशा
समृद्ध डेस्क: जापान के तट के पास समुद्र की गहराई में इतिहास का एक बेहद अहम रहस्य सामने आया है। वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों ने लगभग 745 साल पुराना एक युद्धपोत (shipwreck) खोज निकाला है, जो 13वीं सदी में मंगोल शासक कुबलई खान के जापान पर आक्रमण से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। यह खोज जापान के नागासाकी प्रांत के इमारी बे (Imari Bay) के पास ताकाशिमा द्वीप के निकट हुई है, जहां पहले भी इसी अभियान से जुड़े जहाजों के अवशेष मिल चुके हैं।

बताया जाता है कि जब यह विशाल बेड़ा जापान के पास पहुंचा, तभी एक भयानक तूफान आया, जिसे बाद में “कामिकाज़े” यानी “दिव्य हवा” कहा गया। इस तूफान ने मंगोल सेना के अधिकांश जहाजों को समुद्र में ही डुबो दिया और जो सैनिक बचकर तट तक पहुंचे, उन्हें जापानी सेना ने पराजित कर दिया। यही कारण है कि यह अभियान इतिहास के सबसे असफल सैन्य अभियानों में गिना जाता है।
हाल ही में मिले इस जहाज को वैज्ञानिकों ने 2023 में समुद्र की तलहटी स्कैनिंग तकनीक के जरिए खोजा था। यह जहाज करीब 65 फीट गहराई में मिट्टी और तलछट के नीचे दबा हुआ मिला। जहाज से तलवार, तीर, धातु के बर्तन, सिरेमिक वस्तुएं और खाने-पीने के अवशेष जैसे कई महत्वपूर्ण सामान भी मिले हैं, जो उस समय की युद्ध तकनीक और सैनिकों की जीवनशैली के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज केवल एक जहाज की कहानी नहीं है, बल्कि मध्यकालीन एशिया के सैन्य इतिहास, जहाज निर्माण तकनीक और विभिन्न सभ्यताओं के बीच संपर्क के बारे में अहम सबूत प्रदान करती है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि समुद्र में अभी भी ऐसे कई और जहाज दबे हो सकते हैं, जो आने वाले समय में इतिहास के नए पन्ने खोल सकते हैं।
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