निशिकांत दूबे ने लोकसभा में कहा, जीडीपी को बाइबल, रामायण, महाभारत मान लेना ठीक नहीं
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नयी दिल्ली : देश में गिरती जीडीपी पर बहस छिड़ी हुई है. हर कोई इसको लेकर हर कोई चिंतित है. इस पर आज संसद में चर्चा के दौरान गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने कहा कि केवल जीडीपी को बाइबल, रामायण या महाभारत मान लेना सत्य नहीं है और भविष्य में जीडीपी का कोई बहुत ज्यादा उपयोग भी नहीं होगा. उन्होंने कहा कि जीडीपी 1934 में आया, इससे पहले कोई जीडीपी नहीं था.
Nishikant Dubey, BJP MP in Lok Sabha: Aaj ki nai theory hai ki sustainable economic welfare aam aadmi ka ho raha hai ke nahi ho raha. GDP se zyada important hai ke sustainable development, happiness ho raha hai ke nahi ho raha. https://t.co/GE0LNeyLO6— ANI (@ANI) December 2, 2019
निशिकांत दूबे ने कहा कि आज की नयी थ्योरी है कि सस्टेनेबल इकानोमिक वेलफेयर (सतत आर्थिक विकास) आम आदमी का हो रहा है कि नहीं हो रहा. जीडीपी से ज्यादा महत्वपूर्ण है सस्टेनेबल डेवलपमेंट, हेप्पीनेस हो रहा है कि नहीं हो रहा.
निशिकांत दूबे वित्त मामलों की समिति के सदस्य भी हैं. उल्लेखनीय है कि हाल में आये आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी दर पांच प्रतिशत से भी गिर कर साढे प्रतिशत पर टिक गयी है. इसके बाद मोदी सरकार विपक्षियों के निशाने पर है.
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Edited By: Samridh Jharkhand



