भारत रंग महोत्सव के समापन पर नाटक ‘वापसी’ का भव्य विमोचन
नाट्य विमोचन में प्रमुख रंगकर्मियों और साहित्यिक हस्तियों की उपस्थिति
रांची में भारत रंग महोत्सव के समापन समारोह में राकेश रमण ‘रार’ का प्रथम पूर्णकालिक नाटक ‘वापसी’ का विमोचन हुआ। नाटक वयोवृद्ध पात्रों के माध्यम से संवाद, परंपरा और सामाजिक मूल्यों की आवश्यकता को रेखांकित करता है और झारखंड रंगमंच में एक महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा।
रांची : डोरण्डा स्थित शौर्य्य सभागार में भारत रंग महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर संस्कार भारती झारखंड प्रान्त के नाट्य विधा संयोजक, नगर के रंगकर्मी एवं साहित्यकार राकेश रमण ‘रार’ के प्रथम पूर्णकालिक नाटक ‘वापसी’ का गरिमामय विमोचन सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के तत्वावधान में पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल-कूद तथा युवा कार्य मंत्रालय, झारखण्ड सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया।

अपने संबोधन में लेखक राकेश रमण ‘रार’ ने कहा कि ‘वापसी’ केवल एक कथा नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों, विचारों और सांस्कृतिक मूल्यों की ओर लौटने की एनाटकीयक यात्रा है। नाटक का अधिकांश कथानक वयोवृद्ध पात्रों के इर्द-गिर्द घूमता है, जो स्मृतियों, परंपराओं और बदलते समय के बीच संवाद स्थापित करता है। लेखक के अनुसार यह कृति आधुनिक समाज में मूल्यों की पुनर्स्थापना और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करने वाला एक प्रयोग है।
कार्यक्रम में नगर के अनेक प्रख्यात रंगकर्मी एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे, जिनमें प्रदीप बोस, मिथिलेश कुमार पाठक, शंकर पाठक, छवि दास, अनिल सिकदार, पंकज सिन्हा, सूरज खन्ना, अशोक गोप, विनोद जायसवाल, आशुतोष प्रसाद, कुमकुम गौड़ सहित अन्य गणमान्य शामिल थे।
सभी ने इस नाट्यकृति की सराहना करते हुए इसे समकालीन रंगमंच के लिए महत्वपूर्ण योगदान बताया। समारोह के अंत में उपस्थित दर्शकों ने पुस्तक को उत्साहपूर्वक हाथों-हाथ लिया और लेखक को शुभकामनाएँ दीं। ‘वापसी’ के प्रकाशन को राँची के रंगमंचीय परिदृश्य में एक उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है, जो स्थानीय रंगकर्म और साहित्य को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
Susmita Rani is a journalist and content writer associated with Samridh Jharkhand. She regularly writes and reports on grassroots news from Jharkhand, covering social issues, agriculture, administration, public concerns, and daily horoscopes. Her writing focuses on factual accuracy, clarity, and public interest.
