Sahebganj News: पशु तस्करों के लिए 'सेफ जोन' बना बोरियो प्रखंड, बेनकाब हुआ तस्करी का नया रूट
डुमरिया पशु हाट से खरीदकर पहाड़ी रास्तों से ले जाए जा रहे पशु
साहिबगंज जिले के बोरियो प्रखंड में पशु तस्करी का नया रूट सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, गोड्डा के डुमरिया हाट से खरीदे गए पशुओं को पहाड़ी रास्तों के जरिए पश्चिम बंगाल बॉर्डर तक पहुंचाया जा रहा है। तस्कर पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए अब हाईवे छोड़कर जंगल-पहाड़ वाले रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
साहिबगंज: जिले की स्थापना को 42 साल पूरे हो गए। सरकारी भवनों पर रोशनी है, मंचों से विकास के नारे हैं। पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में सत्ता बदल गई, कानून सख्त हुए, पर साहिबगंज जिले के जंगलों-पहाड़ों से पशु तस्करी का धंधा आज भी बदस्तूर जारी है। बस, तस्करों ने पुलिस से बचने के लिए रूट बदल लिया है।
सूत्र बताते हैं कि अब तस्करी का नया कॉरिडोर बोरियो प्रखंड का जेटकेकुम्हारजोरी बन गया है। हर रविवार गोड्डा जिले के डुमरिया में पशु हाट लगता है। वहीं से तस्कर पशुओं की खरीद करते हैं।

पहले बोरियो-बरहेट मुख्य मार्ग से ट्रकों में भरकर पशु ले जाए जाते थे। कई बार पुलिस ने छापेमारी कर तस्करों को पकड़ा और गाड़ियां जब्त कीं। बस, यहीं से तस्करों ने रणनीति बदल दी। अब ‘हाईवे छोड़ो, पहाड़ पकड़ो’ का फॉर्मूला चल रहा है।
तस्करी का पूरा नेटवर्क लोकल लोगों के बिना अधूरा है। बताया जाता है कि तस्कर पशुओं को हांकने के लिए गांव के लोगों को 800 से 1000 रुपये प्रति चक्कर देते हैं। आगे-आगे ग्रामीण पैदल पशुओं को हांकते हैं, जबकि पीछे-पीछे तस्कर बाइक या बोलेरो से निगरानी करते चलते हैं। रविवार को इलाके के लोग अक्सर पशुओं के झुंड को जाते देखते हैं, पर ‘डर’ के कारण चुप रहते हैं।
बड़ा सवाल यह है कि जब रूट बदलने की खबर गांव-गांव में है, तो पुलिस-प्रशासन के इंटेलिजेंस को इसकी भनक क्यों नहीं? दो जिलों की सीमा पर ‘नो मैन्स लैंड’ बन चुके इन पहाड़ी रास्तों पर ज्वाइंट पेट्रोलिंग क्यों नहीं की जाती? क्या जिला प्रशासन सिर्फ मंच से ‘कानून का राज’ का भाषण देगा, या जमीन पर तस्करों का राज भी तोड़ेगा?
हिंदू धर्म रक्षा मंच के प्रदेश महासचिव बजरंगी महतो ने चिंता जताते हुए कहा कि डुमरिया हाट से बंगाल बॉर्डर तक के इस नए रूट पर तुरंत नाकेबंदी होनी चाहिए। बोरियो, बरहेट और हिरणपुर थानों की ज्वाइंट टास्क फोर्स बनाकर रात में कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जाए। साथ ही, पशुओं को हांकने वाले लोकल लोगों की पहचान कर तस्करों तक पहुंचा जाए। सिर्फ मोहरे नहीं, सरगना पकड़े जाएं।
स्थापना दिवस मना रहे साहिबगंज के लिए यह खबर आईना है। 42 साल में हमने सड़क, भवन और पुल तो बना लिए, पर अगर आज भी जिले के पहाड़ तस्करों के लिए ‘सेफ पैसेज’ बने हुए हैं, तो यह प्रशासनिक नाकामी का जश्न है। जश्न की रोशनी में जिला प्रशासन को उन पशुओं की चीखें भी सुननी चाहिए, जिन्हें हर रविवार रात के अंधेरे में बॉर्डर पार कराया जा रहा है। जिला बना है, पर तंत्र कितना मजबूत हुआ? यही असली सवाल है।
गौ तस्करों में खलबली, गौ भक्तों में खुशी की लहर
सामाजिक कार्यकर्ता अरशद नसर ने DM-SP को सौंपा ज्ञापन
बोले — “बकरीद पर गौ वध रोको, भाईचारा बचाओ”
साहिबगंज: झारखंड-बिहार के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और पशु-पर्यावरण प्रेमी सैयद अरशद नसर ने मंगलवार को प्रशासन की चौखट पर दस्तक दी। उन्होंने शेखपुरा डीएम शेखर आनंद, एसपी बलिराम कुमार चौधरी, एसडीओ प्रियंका कुमारी, एसडीपीओ डॉ. राकेश कुमार और थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार को आवेदन देकर गौ तस्करी और गौ वध पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
अरशद ने कहा कि असामाजिक तत्व लगातार गौ तस्करी कर रहे हैं। आगामी बकरीद पर्व पर गौ वध की आशंका है। ऐसे में प्रशासन सख्ती दिखाए, तस्करों की पहचान करे और कड़ी कानूनी कार्रवाई करे।

अरशद ने याद दिलाया कि बिहार पशु संरक्षण एवं सुधार अधिनियम-1955 के तहत पूरे राज्य में गौ वध पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
उन्होंने समुदाय की धार्मिक भावनाओं, कानून के प्रावधान और देश की मुस्लिम धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं की अपील का हवाला देते हुए मुस्लिम समाज से बकरीद पर गाय की कुर्बानी से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने आपसी भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सिर्फ त्योहार के दौरान ही नहीं, बल्कि आगे भी गौ वध से बचना चाहिए।
अरशद की इस पहल के बाद इलाके के गौ तस्करों में खलबली मच गई है। पशु प्रेमियों और गौ भक्तों ने उनके कदम की खुलकर सराहना की है। अरशद पहले भी गौ वध और तस्करी के खिलाफ अभियान चला चुके हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिला पुलिस-प्रशासन अरशद के आवेदन पर गौ वध रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है? देखना दिलचस्प होगा कि स्थापना दिवस मना रहे बिहार में कानून सिर्फ किताबों में है या जमीन पर भी? बकरीद से पहले प्रशासन की सख्ती दिखेगी या फिर हर साल वाला ‘खेल’ दोहराया जाएगा? कानून सबके लिए है — भावना भी और भाईचारा भी। अब गेंद प्रशासन के पाले में है।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
