सुनील खंडेलवाल का बड़ा आरटीआई अभियान, झारखंड के सभी सरकारी विभागों में पारदर्शिता की विस्तृत रिपोर्ट मांगी

सुनील खंडेलवाल का बड़ा आरटीआई अभियान, झारखंड के सभी सरकारी विभागों में पारदर्शिता की विस्तृत रिपोर्ट मांगी
सुनील खंडेलवाल (फाइल फोटो)

सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने झारखंड सरकार के सभी विभागों में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 के अनुपालन की स्थिति जानने के लिए मुख्य सचिव कार्यालय को विस्तृत आरटीआई आवेदन भेजा है।

गिरिडीह: झारखंड सरकार के अधीन कार्यरत सभी विभागों, निदेशालयों, आयुक्तालयों, जिला, अनुमंडल, प्रखंड एवं अन्य कार्यालयों में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(a) एवं 4(1)(b) के अनुपालन की वास्तविक स्थिति जानने के उद्देश्य से सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल द्वारा राज्य के मुख्य सचिव कार्यालय को एक विस्तृत आरटीआई आवेदन प्रेषित किया गया है।

आवेदन में यह जानकारी मांगी गई है कि राज्य सरकार के अधीनस्थ विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों द्वारा अभिलेखों के सुव्यवस्थित रख-रखाव, सूचीकरण, अनुक्रमण, कम्प्यूटरीकरण तथा अनिवार्य स्वप्रकाशन (Mandatory Disclosure) संबंधी प्रावधानों का किस सीमा तक पालन किया जा रहा है।

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 को अधिनियम की आत्मा माना जाता है। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को सामान्य एवं महत्वपूर्ण सरकारी सूचनाएं बिना आरटीआई आवेदन दिए ही उपलब्ध हो सकें। यदि सभी विभाग धारा 4 का प्रभावी अनुपालन करें, तो आरटीआई आवेदनों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है तथा प्रशासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ सकती है।

प्रेषित आवेदन में राज्य सरकार के सभी विभागों एवं कार्यालयों की सूची, धारा 4(1)(a) एवं 4(1)(b) के अनुपालन की स्थिति, संबंधित वेबसाइटों पर उपलब्ध स्व-प्रकाशित सूचनाओं का विवरण, अनुपालन नहीं करने वाले विभागों की सूची, समीक्षा बैठकों के अभिलेख, जारी निर्देशों एवं निगरानी व्यवस्था संबंधी सूचनाएं मांगी गई हैं।

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आवेदन में मुख्य सचिव कार्यालय से यह भी आग्रह किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 5(4) एवं 5(5) के तहत राज्य के विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों से आवश्यक सहायता प्राप्त कर समेकित रूप से सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं।

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आवेदन में यह कानूनी पक्ष भी रखा गया है कि यह विषय राज्य सरकार के स्तर पर प्रशासनिक समन्वय एवं अनुपालन से जुड़ा हुआ है। इसलिए सूचना को विभिन्न विभागों में धारा 6(3) के अंतर्गत स्थानांतरित करने के बजाय मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा संकलित कर उपलब्ध कराया जाना अधिक उपयुक्त एवं अधिनियम की भावना के अनुरूप होगा।

यह पहल राज्य में पारदर्शी शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा नागरिकों के सूचना के अधिकार को प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि मांगी गई सूचनाएं सार्वजनिक होती हैं, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि झारखंड सरकार के विभिन्न विभाग सूचना का अधिकार अधिनियम के अनिवार्य प्रावधानों का कितना पालन कर रहे हैं तथा किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

नागरिक समाज, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी समय-समय पर यह मांग उठाई है कि सरकारी विभागों द्वारा धारा 4 के तहत अनिवार्य सूचनाओं का नियमित एवं अद्यतन प्रकाशन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता को सरकारी कार्यप्रणाली संबंधी सूचनाएं सहजता से उपलब्ध हो सकें।

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Edited By: Mohit Sinha
Mohit Sinha Picture

Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

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