झारखंड: देश में एनर्जी ट्रांज़िशन की सफलता के लिए झारखंड के क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका निर्णायक

टास्क फ़ोर्स एवं सीड द्वारा झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स से संबंधित शोधपरक रिपोर्ट का विमोचन 

झारखंड: देश में एनर्जी ट्रांज़िशन की सफलता के लिए झारखंड के क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका निर्णायक
क्रिटिकल मिनरल्स से संबंधित शोधपरक रिपोर्ट का विमोचन

मुख्य बिंदु
  • अन्य राज्यों के मुकाबले यहां सबसे ज्यादा 12 महत्वपूर्ण खनिजों की उपस्थिति
  • अक्षय ऊर्जा प्रणालियों, उच्च तकनीक के अनुप्रयोगों, इलेक्ट्रिक वाहनों और एनर्जी स्टोरेज उपकरणों के उत्पादन के लिए बेहद अहम
  • झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स की रणनीतिक भूमिका एवं इसके व्यावसायिक महत्व का विश्लेषण


रांची: टास्क फोर्स-सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन (झारखंड सरकार) और इसके टेक्निकल पार्टनर सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कांफ्रेंस में गुरुवार को एनर्जी ट्रांजिशन में झारखंड के क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका पर एक विशेष रिपोर्ट का विमोचन किया गया। रिपोर्ट में देश में डीकार्बोनाइजेशन और क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन को गति देने में झारखंड के क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट का विमोचन राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और उद्योग, खान एवं भू-तत्व सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, एनर्जी थिंक टैंक और सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। 

टास्क फोर्स एवं सीड द्वारा तैयार यह रिपोर्ट देश के किसी राज्य में क्रिटिकल मिनरल्स की संभावना पर केंद्रित बेहद महत्वपूर्ण शोध-अध्ययन में से एक है। क्रिटिकल मिनरल्स को अक्सर दुर्लभ पृथ्वी तत्व और सामरिक महत्व के खनिजों के रूप में भी वर्गीकृत किया जाता है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा प्रणालियों और उन्नत चिकित्सा उपकरणों सहित उच्च तकनीक अनुप्रयोगों के उत्पादन में एक अपरिहार्य भूमिका निभाते हैं। 

रिपोर्ट की सराहना करते हुए झारखंड सरकार के राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष ए.पी. सिंह (आईएएस, सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह रिपोर्ट बेहद सामयिक है। दुनिया भर में क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका पर नए अन्वेषण, खनन- उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है, हालांकि इसकी सफलता कुशल संसाधन प्रबंधन पर निर्भर है। झारखंड में इन मिनरल्स की पहचान और उपयोग औद्योगिक विकास को नई गति दे सकता है, निवेश, रोजगार और औद्योगिक ढांचे के विकास के रास्ते खोल सकता है। इन संसाधनों से राज्य ही नहीं, बल्कि देश में ऊर्जा सुरक्षा एवं विकास के लक्ष्यों में मदद मिलेगी। 

यह रिपोर्ट व्यापक शोध और इंटरनेशनल केस स्टडीज की विस्तृत समीक्षा के जरिए झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स की वर्तमान स्थिति एवं भावी परिदृश्य का विश्लेषण करती है। राज्य में जिन 12 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान की गयी है, उनमें तांबा, निकल, ग्रेफाइट, सिलिकॉन, लिथियम, वेनेडियम, कोबाल्ट, मॉलीब्लेन्डम, टाइटेनियम, ज़िरकोनियम, गैलियम, कैडमियम, टेलुरियम, सेलेनियम आदि प्रमुख हैं। 

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कांफ्रेंस के उद्देश्य एवं रिपोर्ट के व्यापक संदर्भ पर विस्तार से बताते हुए ए.के. रस्तोगी (आईएफएस, सेवानिवृत्त), अध्यक्ष, टास्क फोर्स-सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन, झारखंड ने कहा कि कम कार्बन आधारित अर्थव्यवस्था और सततशील एनर्जी ट्रांज़िशन की सफलता क्रिटिकल मिनरल्स के सुसंगत उपयोग पर निर्भर करती है। 

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झारखंड में क्रिटिकल मिनरल्स सम्पदा एवं मजबूत औद्योगिक संरचना है, इस क्रम में यह रिपोर्ट भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और मजबूत सप्लाई नेटवर्क के संदर्भ में राज्य के योगदान को नए सिरे से रेखांकित करती है। शोध-अध्ययन में झारखंड में स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में नवाचार, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजित करने की क्षमता पर ध्यान दिया गया है, ताकि यह राज्य देश में नेट-जीरो एवं क्लाइमेट रिसिलिएंस इकोनॉमी के लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।  

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झारखंड सरकार के खान एवं भू-तत्व विभाग में खान निदेशक शशि रंजन (आईएएस) ने इन मिनरल्स की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने और भारत के ऊर्जा लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान देने में राज्य की खनन क्षमताओं और बुनियादी ढांचे को इस लिहाज से उचित एवं प्रासंगिक बताया। उद्योग विभाग के निदेशक सुशांत गौरव (आईएएस) ने एक स्वच्छ औद्योगिक ढाँचे को व्यापक बनाने में अनुसंधान एवं विकास और निवेश की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बेस्ट केस स्टडीज के अध्ययन और झारखंड में इनके अनुपालन पर जोर दिया। 

क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के विषय पर राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा कि यह रिपोर्ट झारखंड को फ्यूचर-रेडी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शोध-अध्ययन है। इन खनिज संसाधनों का औद्योगिक उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन एक महत्वपूर्ण चुनौती है, इसके लिए अंतर्विभागीय समन्वय पर आधारित बेहतर गवर्नेंस प्रणाली एवं नीति-क्रियान्वयन जरूरी है। 

कार्यक्रम में इंद्रदेव नारायण, सीएमडी, मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड, केके वर्मा, निदेशक, जेरेडा, झारखंड, अच्युत घटक, निदेशक (टेक्निकल), सीएमपीडीआई, डॉ. निहारिका टैगोत्रा ​​(वरिष्ठ अनुसंधान विशेषज्ञ, वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट),  चरिथ कोंडा (ऊर्जा विशेषज्ञ, आइफा), डॉ. मनीष राम (निदेशक - जलवायु और ऊर्जा, सीड),  अश्विनी अशोक (निदेशक - जस्ट ट्रांजिशन और पर्यावरण, सीड), सिद्धार्थ गोयल (प्रमुख, ऊर्जा कार्यक्रम, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट) और अपूर्व कुलकर्णी, अनुसंधान प्रमुख, ओएमआई फाउंडेशन ने भी विचार रखे। 

तकनीकी सत्रों में जो प्रमुख सुझाव सामने आए

तकनीकी और आर्थिक बाधाओं के समाधान पर ठोस नीतिगत पहल, तकनीकी-व्यावसायिक अध्ययन करना, कुशल खनिज संसाधन प्रबंधन, प्रौद्योगिकियों और ज्ञान को साझा करना, खनन तकनीकों में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश, पर्यावरण क्षरण को कम करने के लिए वैज्ञानिक खनन को प्रोत्साहन देना, सर्कुलर इकोनॉमी दृष्टिकोण को अपनाना,  सततशील ऊर्जा समाधानों को प्राथमिकता देना और स्थानीय आबादी के समावेशी विकास पर जोर देना आदि।

Edited By: Samridh Jharkhand

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