सात समंदर पार बंधी काव्य की डोर: साहिबगंज से सऊदी तक गूंजा 'वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स' का तराना
अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में 10 देशों के श्रोताओं ने लिया हिस्सा
लखनऊ के साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. मनोज अग्रवाल ‘गुमनाम लखनवी’ के मंच ‘वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स’ पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में 10 देशों के कवियों और श्रोताओं ने हिस्सा लिया।
साहिबगंज/नई दिल्ली: जब इलाज और अल्फ़ाज़ एक मंच पर मिल जाएं, तो महफ़िल नहीं, इतिहास बनता है। कुछ ऐसा ही हुआ लखनऊ के प्रख्यात चिकित्सक-सह-साहित्यकार डॉ. मनोज अग्रवाल 'गुमनाम लखनवी' के साहित्यिक मंच 'वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स' पर।
10 देशों में लाइव, स्क्रीन पर सजी महफिल
आभासी पटल पर सजी इस अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में देश-विदेश के नामचीन कवियों और श्रोताओं ने शिरकत की। खास बात ये रही कि सऊदी अरब के अनीस अहमद भाई और झांसी के पंकज कुमार खरे 'लेश' ने मिलकर ऐसा डिजिटल मंच सजाया कि इसे करीब 10 देशों में लाइव देखा गया। सात समंदर पार बैठे लोग भी लखनवी तहज़ीब के कायल हो गए।
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'गुमनाम' आए तो छा गए
मंच के सूत्रधार डॉ. मनोज अग्रवाल 'गुमनाम लखनवी' जब मंच पर आए तो हास्य की फुलझड़ियां छूट पड़ीं। उनकी हास्य अभिव्यक्ति ने गंभीर महफिल में ठहाकों का रंग भर दिया।
अनीस ने नाम का मान रखा
सऊदी अरब से जुड़े अनीस अहमद ने अपनी शायरी से साबित कर दिया कि उनका नाम 'अनीस' यानी मित्र और अद्वितीय यूं ही नहीं है। हर शेर पर 'वाह-वाह' की सदाएं गूंजीं।
'स्वरा' की जादूगरी, 'बेजार' का जादू
विशिष्ट अतिथि शहडोल की संगीता शुक्ला 'स्वरा' की लोकलुभावन प्रस्तुति और शब्दों की जादूगरी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। अध्यक्षीय उद्बोधन के लिए अहमदाबाद से आए सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी बेजार अहमदाबादी ने जब ग़ज़ल सुनाई तो महफिल में सन्नाटा खिंच गया। उनकी बेजोड़ प्रस्तुति ने साबित किया कि वर्दी के पीछे एक नाजुक दिल भी धड़कता है।
10 देशों से आईं प्रतिक्रियाएं – "लगा हम लखनऊ में ही बैठे हैं"
- दुबई से फातिमा शेख: "प्रो. सुबोध की ग़ज़ल सुनकर आंखें नम हो गईं। स्क्रीन पर थे, पर लगा लखनऊ की शाम में बैठे हैं। 'गुमनाम' साहब का मंच वाकई वंडरफुल है।"
- कनाडा से अमनदीप सिंह: "पंकज 'लेश' भाई का संचालन और गायकी कमाल। टाइम ज़ोन का फर्क भूल गए। 3 बजे रात को भी पूरी फैमिली के साथ बैठे रहे।"
- लंदन से डॉ. श्वेता वर्मा: "अनीस भाई की शायरी में सऊदी की तपिश और लखनवी नज़ाकत दोनों थी। तकनीक ने दूरियों को मिटा दिया।"
- कतर से मोहम्मद जावेद: "बेजार अहमदाबादी साहब को सुनकर यकीन नहीं हुआ कि ये रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर हैं। अल्फ़ाज़ में इतनी नर्मी कहां से लाते हैं।"
- साहिबगंज से श्रोता अमन कुमार होली: "अपने 'आशु' सर को इंटरनेशनल मंच पर देखकर सीना चौड़ा हो गया। हमारा साहिबगंज भी अब ग्लोबल है।"
'गुमनाम' का नाम, काम बेमिसाल
डॉ. मनोज अग्रवाल 'गुमनाम लखनवी' द्वारा स्थापित यह मंच लगातार ऐसी ही उच्चस्तरीय गोष्ठियों के लिए जाना जाता है। अंत में प्रो. सुबोध ने मंच पंकज खरे के सुपुर्द किया, जिन्होंने काव्य गोष्ठी की समाप्ति की घोषणा की। आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और 10 देशों के श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
