हिंदी साहित्य
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Read More... लोकार्पण: जब साहित्य औपचारिकता के 'समोसे' में खो गया....
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By Mohit Sinha
यह व्यंग्यात्मक आलेख आज के साहित्यिक लोकार्पण समारोहों की बदलती तस्वीर को सामने लाता है। लेखक ने दिखाया है कि कैसे किताबों का विमोचन अब साहित्यिक विमर्श से अधिक दिखावे, औपचारिकता, सोशल मीडिया प्रचार और चाय-समोसे के आयोजनों तक सीमित होता जा रहा है। बढ़ते कॉकरोच को कैसे खत्म करें?
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By Mohit Sinha
ओम प्रकाश प्रीत "सोनू" का यह व्यंग्य लेख कॉकरोचों को खत्म करने की साधारण घरेलू समस्या से शुरू होकर भारतीय राजनीति के जटिल समीकरणों तक पहुंचता है। बशीर बद्र: वो शायर जो हमारे टूटे दिल की बोली बोल गया
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By Mohit Sinha
उर्दू शायरी के मशहूर शायर बशीर बद्र ने अपनी सरल, संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली ग़ज़लों से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनकी शायरी मोहब्बत, रिश्तों, यादों और इंसानियत की गहरी समझ को बयां करती है। सात समंदर पार बंधी काव्य की डोर: साहिबगंज से सऊदी तक गूंजा 'वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स' का तराना
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By Mohit Sinha
लखनऊ के साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. मनोज अग्रवाल ‘गुमनाम लखनवी’ के मंच ‘वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स’ पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में 10 देशों के कवियों और श्रोताओं ने हिस्सा लिया। Ranchi News: महिला काव्य मंच की काव्य गोष्ठी में सजी कविता और ग़ज़लों की महफिल
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By Mohit Sinha
महिला काव्य मंच, पूर्वी रांची जिला इकाई की ओर से शनिवार को रेणु मिश्रा के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरुग्राम से आए प्रसिद्ध कवि, ग़ज़लकार और साहित्यकार डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’ का स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। आज का जीवन: रिश्तों से दूर होती संवेदनाओं की कविता
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By Susmita Rani
“आज का जीवन” कविता आधुनिक समाज में बढ़ती स्वार्थ भावना, टूटते रिश्तों और प्रकृति से दूर होते मनुष्य की पीड़ा को सरल और भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है। 