बढ़ते कॉकरोच को कैसे खत्म करें? 

कॉकरोच खत्म करने की तलाश में निकला लेखक पहुंच गया राजनीतिक गलियारों तक

बढ़ते कॉकरोच को कैसे खत्म करें? 
ओम प्रकाश प्रीत "सोनू"

ओम प्रकाश प्रीत "सोनू" का यह व्यंग्य लेख कॉकरोचों को खत्म करने की साधारण घरेलू समस्या से शुरू होकर भारतीय राजनीति के जटिल समीकरणों तक पहुंचता है।

ओम प्रकाश प्रीत "सोनू "

पत्नी की शिकायत थी कि घर में कॉकरोच बढ़ते जा रहे हैं। पति होने के नाते मेरी जिम्मेदारी थी कि इस राष्ट्रीय संकट का समाधान खोजूँ। मैंने तुरंत गूगल का दरवाज़ा खटखटाया और पूछा—"बढ़ते कॉकरोच को कैसे खत्म करें?"

जवाब आया—बोरिक एसिड और चीनी का मिश्रण सबसे असरदार है। इसके अलावा बेकिंग सोडा और चीनी का प्रयोग, नीम का तेल, तेजपत्ता आदि का इस्तेमाल करके आप इन्हें आसानी से और सुरक्षित तरीके से घर से बाहर निकाल सकते हैं।

मैंने ध्यान से पढ़ा। मैंने पूछा था "खत्म कैसे करें?" और जवाब मिल रहा था "घर से बाहर कैसे निकालें?"
फिर मैंने यूट्यूब देखा, एआई से पूछा, लेख पढ़े। लगभग हर जगह वही बात, बस शब्दों की पैकिंग अलग-अलग थी। मुझे लगा कि मामला कुछ संदिग्ध है। अगर ये उपाय इतने ही कारगर होते तो कॉकरोच अब तक इतिहास की किताबों में मिलते, रसोई में नहीं।

यह भी पढ़ें: डिजिटल ठगी का नया चेहरा: जब बैंकिंग व्यवस्था बन जाती है हथियार

फिर मैंने सोचा कि शायद ये सामान्य कॉकरोच नहीं हैं। ये उस प्रजाति के हैं जो हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेती है। आप हमला करते हैं, वे रणनीति बदल लेते हैं। आप एक दरार बंद करते हैं, वे दूसरी खोज लेते हैं। आप सोचते हैं कि मामला खत्म हो गया, और कुछ दिन बाद वे पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ वापसी कर लेते हैं।

यह भी पढ़ें: पत्रकार बनना आसान है, पत्रकारिता करना मुश्किल

यहीं से मेरा दिमाग राजनीति की तरफ मुड़ गया। कॉकरोच और राजनीति में एक अद्भुत समानता है। दोनों को खत्म करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय बताते हैं, लेकिन कुछ समय बाद वे किसी नए कोने, नए चेहरे, नए नारे या नए गठबंधन के साथ फिर सामने आ जाते हैं।

कॉकरोच बिना चुनाव लड़े हर घर में सत्ता में बने रहते हैं और राजनीति में भी कुछ ऐसी शक्तियाँ हैं जो चुनाव हारकर भी चर्चा में बनी रहती हैं। फिर मेरा ध्यान BJP और उसके विरोधियों की तरफ चला गया। मैं सोचने लगा कि BJP का विरोध करने वाली पार्टियों के नामों में आखिर "C" का प्रभाव इतना अधिक क्यों दिखाई देता है?

कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी राजनीतिक ज्योतिषी ने वर्षों पहले कोई गुप्त सलाह दी हो, "सत्ता चाहिए तो कमल चुनिए, और विपक्ष में रहना है तो नाम में C रखिए।" हालाँकि यह भी हो सकता है कि यह मेरे दिमाग की ही उड़ान हो। आखिर पत्नी ने मुझे कॉकरोच मारने भेजा था और मैं राजनीतिक विश्लेषण करने बैठ गया। मेरे दिमाग की भी एक समस्या है। उसे एक विषय पर टिककर रहने की आदत नहीं। वह बोरिक एसिड से शुरू होकर लोकतंत्र पर समाप्त होता है।

अब देखिए न, इसे लगने लगा कि C for Cockroach भी कहीं न कहीं राजनीतिक विज्ञान का ही हिस्सा है।समानताएँ भी कम नहीं हैं। दोनों की उपस्थिति से लोग परेशान रहते हैं। दोनों को हटाने के लिए समय-समय पर अभियान चलते हैं। दोनों के बारे में बार-बार घोषणा होती है कि "इस बार इनका अंत निश्चित है।"

लेकिन कुछ समय बाद पता चलता है कि वे किसी नई दरार, नए मंच, नए गठबंधन या नए रूप में फिर उपस्थित हैं। वैसे कॉकरोचों की एक और विशेषता है। वे कभी अकेले नहीं आते। पहले एक दिखता है, फिर दूसरा, फिर तीसरा। और जब तक आप स्थिति समझते हैं, तब तक वे घर का नक्शा आपसे बेहतर जान चुके होते हैं।

राजनीति में भी अक्सर कुछ ऐसा ही होता है। पहले एक बयान आता है, फिर प्रतिक्रिया, फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस, फिर गठबंधन, फिर महागठबंधन, और देखते ही देखते पूरा देश बहस में बदल जाता है। कभी-कभी तो मुझे लगता है कि इस देश में दो ही चीजें सचमुच अमर हैं।

पहला—कॉकरोच।
दूसरा—विपक्ष के पुनर्गठन की बैठकें।

कॉकरोच समय-समय पर अपना ठिकाना बदलते हैं और विपक्ष समय-समय पर अपना समीकरण। कॉकरोच रसोई में मिल जाते हैं, पुनर्गठन की बैठकें राजधानी में। दोनों की गतिविधियाँ अक्सर रात में तेज़ हो जाती हैं और दोनों के बारे में सुबह उठकर नई खबर मिलती है।

फर्क बस इतना है कि कॉकरोचों के पास प्रवक्ता नहीं होते। अगर होते, तो शायद वे भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताते कि उनका विस्तार दरअसल "जनसमर्थन" का परिणाम है और रसोई में उनकी बढ़ती उपस्थिति जनता के विश्वास का प्रमाण है।

खैर, मैं अभी भी कॉकरोच खत्म करने का उपाय खोज रहा हूँ। लेकिन जितना पढ़ रहा हूँ, उतना ही विश्वास मजबूत हो रहा है कि कुछ चीजें वास्तव में खत्म नहीं होतीं। वे केवल अपना नाम, पता, रूप और रणनीति बदलती हैं।

और शायद यही कारण है कि कॉकरोच विज्ञान और राजनीति विज्ञान, दोनों का अंतिम निष्कर्ष एक ही है—
"सावधान रहिए, अगली पीढ़ी पहले से ज्यादा संगठित होकर लौट सकती है।"

गूगल न्यूज से जुड़ें... Follow करें
चैनल से जुड़ें 👉
Edited By: Mohit Sinha
Mohit Sinha Picture

Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.

Latest News

पत्रकार बनना आसान है, पत्रकारिता करना मुश्किल पत्रकार बनना आसान है, पत्रकारिता करना मुश्किल
हेमंत सोरेन को बड़ा झटका: बड़गाई जमीन घोटाला मामले में डिस्चार्ज याचिका खारिज
भारत ने रचा इतिहास, अफगानिस्तान को पारी और 300 रन से रौंदा; मानव सुथार बने जीत के नायक
राज्यसभा चुनाव: नामांकन के अंतिम दिन झारखंड की राजनीति गरमाई, तीन प्रमुख उम्मीदवारों ने दाखिल किया पर्चा
Dhanbad News: सीआईएसएफ की बड़ी कार्रवाई, अवैध कोयला लदी बाइक जब्त; तस्कर फरार
होटल ड्रीम स्टार में शराब को लेकर बवाल: दोनों पक्षों ने दर्ज कराई FIR, अब सीसीटीवी खोलेगा राज
साहिबगंज का वार्ड-26 अंधेरे में कैद: काली मंदिर से हर गली तक बत्ती गुल, वार्डवासियों में आक्रोश
बढ़ते कॉकरोच को कैसे खत्म करें? 
डेब्यू टेस्ट में छाए मानव सुथार, 46 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास
गिरिडीह में सनसनी: पिता ने तीन मासूम बेटियों की धारदार हथियार से की हत्या, आरोपी गिरफ्तार
विभूति एक्सप्रेस की चपेट में आने से युवक की मौत, रेलवे ट्रैक पर मिला क्षत-विक्षत शव
ईरान-इजरायल तनाव फिर बढ़ा: मिसाइल हमले के बाद इजरायल का पलटवार, मध्य पूर्व में बढ़ी चिंता