साहित्य
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Read More... आपसी मनमुटाव ठीक नहीं
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By Mohit Sinha
‘आपसी मनमुटाव ठीक नहीं’ कविता रिश्तों में बढ़ती दूरियों, खामोशी और संवादहीनता की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि चुन्नू साहा ने जीवन की नश्वरता और अपनों के महत्व को रेखांकित करते हुए संदेश दिया है कि मनमुटाव को लंबे समय तक नहीं पालना चाहिए। लोकार्पण: जब साहित्य औपचारिकता के 'समोसे' में खो गया....
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By Mohit Sinha
यह व्यंग्यात्मक आलेख आज के साहित्यिक लोकार्पण समारोहों की बदलती तस्वीर को सामने लाता है। लेखक ने दिखाया है कि कैसे किताबों का विमोचन अब साहित्यिक विमर्श से अधिक दिखावे, औपचारिकता, सोशल मीडिया प्रचार और चाय-समोसे के आयोजनों तक सीमित होता जा रहा है। बढ़ते कॉकरोच को कैसे खत्म करें?
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By Mohit Sinha
ओम प्रकाश प्रीत "सोनू" का यह व्यंग्य लेख कॉकरोचों को खत्म करने की साधारण घरेलू समस्या से शुरू होकर भारतीय राजनीति के जटिल समीकरणों तक पहुंचता है। बशीर बद्र: वो शायर जो हमारे टूटे दिल की बोली बोल गया
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By Mohit Sinha
उर्दू शायरी के मशहूर शायर बशीर बद्र ने अपनी सरल, संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली ग़ज़लों से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनकी शायरी मोहब्बत, रिश्तों, यादों और इंसानियत की गहरी समझ को बयां करती है। सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, सुरक्षा भी चाहिए: झारखंड के साहित्यकारों और कलाकारों के लिए कल्याण कोष की मांग
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By Mohit Sinha
झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने वाले साहित्यकारों और लोक कलाकारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। खोरठा साहित्यकार स्व. सुरेश कुमार विश्वकर्मा ‘सुकुमार’ और पद्मश्री डॉ. गिरिधारी राम गौंझू जैसे सांस्कृतिक व्यक्तित्वों के संघर्ष ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या समाज और व्यवस्था केवल सम्मान तक सीमित है। कीर्ति नारायण मिश्र को विश्वम्भर मैथिली साहित्य सम्मान
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By Samridh Jharkhand
रांची: विश्वम्भर मैथिली साहित्य सम्मान 2020 के लिए कवि कीर्ति नारायण मिश्र के नाम की घोषणा की गई। अरगोड़ा स्थित विश्वम्भर फाउंडेशन के कार्यालय में एक प्रेस वार्ता रखी गई। जहां फाउंडेशन के सदस्यगण एवं सचिव मौजूद रहे। प्रेस को... 