आपसी मनमुटाव ठीक नहीं
रिश्तों में आई खामोशी और दूरियों का भावनात्मक चित्रण
‘आपसी मनमुटाव ठीक नहीं’ कविता रिश्तों में बढ़ती दूरियों, खामोशी और संवादहीनता की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि चुन्नू साहा ने जीवन की नश्वरता और अपनों के महत्व को रेखांकित करते हुए संदेश दिया है कि मनमुटाव को लंबे समय तक नहीं पालना चाहिए।
अब बातें नहीं होती हैं,
पहले खूब बातें होती थीं।
फिर अचानक बातें बंद हो गईं,
न जाने क्यों, समझ न पाए।
खैर, कोई बात नहीं।
नहीं होती हैं बातें तो
नहीं होने दो, क्या होगा?
थोड़ी तकलीफ होगी मन में।

अब झुकना भी तो अच्छा नहीं लगता है।
झुके भी हैं कई बार उसके पास,
आखिर हुआ क्या है, गलती मुझसे?
बस, बातें नहीं होती हैं तो नहीं।
कुछ दिनों तक खराब लगा खूब,
लेकिन अब तो आदत हो गई।

आमने-सामने हो जाने पर भी तो
खामोशी से कुछ लोकाचार की बातें,
फिर वो अपने और मैं अपने,
पता ही नहीं चलता कि कोई है भी।
लेकिन एक बात चुन्नू कवि का कहना है,
ऐसी परिस्थिति होना ठीक नहीं।
इस नश्वर तन का कोई भरोसा नहीं,
अतः आपस में बातें होनी चाहिए।
आपसी मनमुटाव ठीक नहीं,
जरूरत अपनों की ही होती है।
न जाने कब, कहाँ, किसके साथ
जरूरत आ पड़े एक-दूसरे की।
— चुन्नू साहा
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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