Hindi poetry
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गुरु-पदावली: गुरु महिमा पर चुन्नू साहा की भावपूर्ण कविता

गुरु-पदावली: गुरु महिमा पर चुन्नू साहा की भावपूर्ण कविता 'गुरु-पदावली' कवि चुन्नू साहा की एक प्रेरणादायक कविता है, जिसमें गुरु की महिमा, उनके महत्व और जीवन में उनकी भूमिका का सुंदर वर्णन किया गया है। कविता बताती है कि गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन का सही मार्ग दिखाने वाला प्रकाश है।
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पुरुषोत्तम मास में क्यों बढ़ जाता है दान-पुण्य का महत्व? पढ़ें यह सुंदर काव्य रचना

पुरुषोत्तम मास में क्यों बढ़ जाता है दान-पुण्य का महत्व? पढ़ें यह सुंदर काव्य रचना कवयित्री सुनीता अग्रवाल ‘पिंकी’ की यह कविता अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास के धार्मिक महत्व, दान-पुण्य, संयम और आध्यात्मिक साधना की महत्ता को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है।
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आपसी मनमुटाव ठीक नहीं

आपसी मनमुटाव ठीक नहीं ‘आपसी मनमुटाव ठीक नहीं’ कविता रिश्तों में बढ़ती दूरियों, खामोशी और संवादहीनता की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि चुन्नू साहा ने जीवन की नश्वरता और अपनों के महत्व को रेखांकित करते हुए संदेश दिया है कि मनमुटाव को लंबे समय तक नहीं पालना चाहिए।
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Ranchi News: महिला काव्य मंच की काव्य गोष्ठी में सजी कविता और ग़ज़लों की महफिल

Ranchi News: महिला काव्य मंच की काव्य गोष्ठी में सजी कविता और ग़ज़लों की महफिल महिला काव्य मंच, पूर्वी रांची जिला इकाई की ओर से शनिवार को रेणु मिश्रा के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरुग्राम से आए प्रसिद्ध कवि, ग़ज़लकार और साहित्यकार डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’ का स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
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आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता

आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता “आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं।
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'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल

'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल कवि राजेश पाठक की कविता “जादूगर” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। कविता में प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कानून की कमजोर स्थिति, किसानों और आम जनता की परेशानियों तथा व्यवस्था की निष्क्रियता को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया गया है।
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“बेटी की पुकार – एक भावपूर्ण कविता”

“बेटी की पुकार – एक भावपूर्ण कविता” यह कविता एक बेटी की भावनाओं को व्यक्त करती है, जो पढ़-लिखकर सम्मानजनक जीवन जीना चाहती है। मजदूरी और मजबूरी के जीवन से दूर, वह शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का सपना देखती है।
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