गुरु-पदावली: गुरु महिमा पर चुन्नू साहा की भावपूर्ण कविता
कविता में गुरु को जीवन का सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया गया है
'गुरु-पदावली' कवि चुन्नू साहा की एक प्रेरणादायक कविता है, जिसमें गुरु की महिमा, उनके महत्व और जीवन में उनकी भूमिका का सुंदर वर्णन किया गया है। कविता बताती है कि गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन का सही मार्ग दिखाने वाला प्रकाश है।
गुरु महिमा अनंत है, कैसे करूँ गुरु का बखान?
गलतियों को क्षमा करें, स्वीकार करें
चुन्नू कवि का प्रणाम।
प्रथम पूज्य तो गुरु हैं, फिर पूजो भगवान।
गुरु ने ही तो कराई हमें
भगवान की पहचान।

गुरु बिन यह जीवन सारा
मिथ्या और बेकार।
जो अंधेरों में भी दिखलाए रोशनी,
उसे ही गुरु मान।

इसे स्वीकार करो इंसान।
बोलना, चलना, खेलना सिखाया जिन्होंने,
मत भूलो उनका सम्मान।
हर एक प्राणी है गुरु समान,
यदि आए वह तेरे काम।
सिर्फ इंसान ही गुरु होते हैं,
इस भ्रम में मत रहो, इंसान।
गुरु का कद है बहुत बड़ा,
गुरु के आगे कोई नहीं खड़ा।
गुरु बिना यह जीवन हमारा,
अधूरा है, बिल्कुल अधूरा।
कैसा हो गुरु? कैसे दूँ परिभाषा?
जो अक्षर-ज्ञान कराए, वही गुरु।
जो जीवन का सार बताए,
वही सच्चा गुरु।
गुरु वही है, जो तेरे
मस्तिष्क के खोल दे द्वार।
भले वह पढ़ा-लिखा हो,
या जीवन जीने का रखता हो आधार।
ऊँच-नीच, सुख-दुख, भले-बुरे की
जो कराए पहचान।
वही है सर्वश्रेष्ठ गुरु,
उसे दीजिए उचित सम्मान।
गुरु की महिमा, गुरु का बखान
यदि करने में हुई हो कोई गलती,
चुन्नू कवि को कर देना क्षमा,
यही है सबसे विनती।
— चुन्नू साहा, पाकुड़ (झारखंड)
Mohit Sinha is a writer associated with Samridh Jharkhand. He regularly covers sports, crime, and social issues, with a focus on player statements, local incidents, and public interest stories. His writing reflects clarity, accuracy, and responsible journalism.
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